एथेनॉल सेक्टर: क्षमता बढ़ाने की जगह अब मौजूदा साधनों के बेहतर इस्तेमाल पर होगा ज़ोर
भारत का एथेनॉल उद्योग अब एक नए दौर में प्रवेश कर रहा है, जहाँ नई क्षमताएं जोड़ने के बजाय मौजूदा डिस्टिलेशन क्षमता के बेहतर उपयोग पर ध्यान केंद्रित किया जाएगा। समाचार एजेंसी IANS की एक रिपोर्ट के…
भारत का एथेनॉल उद्योग अब एक नए दौर में प्रवेश कर रहा है, जहाँ नई क्षमताएं जोड़ने के बजाय मौजूदा डिस्टिलेशन क्षमता के बेहतर उपयोग पर ध्यान केंद्रित किया जाएगा। समाचार एजेंसी IANS की एक रिपोर्ट के अनुसार, देश की मौजूदा 18.25 अरब लीटर की डिस्टिलेशन क्षमता, भविष्य की मांग को पूरा करने के लिए काफी हद तक पर्याप्त है।
ब्रिकवर्क रेटिंग्स की बुधवार को जारी रिपोर्ट में अनुमान लगाया गया है कि पेट्रोल में 25% एथेनॉल मिश्रण (E25) लागू होने की सामान्य स्थिति में, वित्त वर्ष 2031 तक देश की एथेनॉल मांग 17.9 अरब लीटर तक पहुंच सकती है। इस मांग को पूरा करने के लिए मौजूदा क्षमता का लगभग 98% इस्तेमाल होगा, जो यह दिखाता है कि नई फैक्ट्रियों की तत्काल आवश्यकता नहीं है।
मांग के तीन संभावित परिदृश्य
रिपोर्ट भविष्य की मांग को लेकर तीन अलग-अलग स्थितियां बताती है, जो पूरी तरह से सरकार की ब्लेंडिंग नीति की गति पर निर्भर करेंगी:
- सामान्य स्थिति (Base Case): यदि मिश्रण E25 तक पहुंचता है तो वित्त वर्ष 2031 तक मांग 17.9 अरब लीटर होगी।
- सबसे खराब स्थिति (Bear Case): अगर मिश्रण मौजूदा E20 स्तर पर ही बना रहता है, तो मांग 14.3 अरब लीटर तक सीमित रहेगी, जिससे मौजूदा क्षमता का सिर्फ 78% ही उपयोग हो पाएगा।
- सबसे अच्छी स्थिति (Bull Case): यदि सरकार मिश्रण को E30 (30% ब्लेंडिंग) तक ले जाती है, तो मांग 21.5 अरब लीटर तक पहुंच सकती है। यह मौजूदा क्षमता से 18% अधिक होगी और तब इस सेक्टर में नई क्षमता जोड़ने की ज़रूरत पैदा होगी।
फीडस्टॉक और मुनाफे की स्थिति
रिपोर्ट में एथेनॉल बनाने के लिए इस्तेमाल होने वाले कच्चे माल (फीडस्टॉक) में एक बड़ा बदलाव देखा गया है। एथेनॉल सप्लाई वर्ष (ESY26) के पहले चरण में, 72% आवंटन अनाज-आधारित डिस्टिलरीज को हुआ, जबकि सिर्फ 28% चीनी-आधारित मिलों को मिला। यह 2021 के रोडमैप में तय 55:45 (चीनी:अनाज) के अनुपात के बिल्कुल विपरीत है। अकेले मक्के की हिस्सेदारी कुल आवंटन में 45.7 प्रतिशत थी।
हालांकि, कच्चे माल की लागत का दबाव अनाज-आधारित डिस्टिलरीज के मुनाफे पर दिख रहा है। उनका EBITDA मार्जिन वित्त वर्ष 21 के 9.2% से घटकर वित्त वर्ष 25 में 6.7% रह गया है।
सेक्टर का भविष्य और क्रेडिट आउटलुक
चूंकि E20 मिश्रण का लक्ष्य लगभग हासिल हो चुका है और पर्याप्त उत्पादन क्षमता पहले से मौजूद है, अब उद्योग का ध्यान क्षमता के बेहतर इस्तेमाल और मौजूदा संपत्तियों से कमाई बढ़ाने पर होगा। रेटिंग एजेंसी ने सरकारी खरीद नीति और बैंकों द्वारा सेक्टर को दिए गए 420 अरब रुपए से अधिक के ऋण को देखते हुए एथेनॉल सेक्टर के लिए क्रेडिट आउटलुक को 'स्थिर' बनाए रखा है।
इनपुट: IANS



