पैलेट गन के इस्तेमाल पर प्रतिबंध की मांग लेकर सुप्रीम कोर्ट पहुंचे पूर्व IB अधिकारी और पीड़ित
भीड़ को नियंत्रित करने के लिए सुरक्षा बलों द्वारा इस्तेमाल की जाने वाली पैलेट गन पर पूरी तरह रोक लगाने की मांग को लेकर सुप्रीम कोर्ट में एक याचिका दायर की गई है। इस याचिका को इंटेलिजेंस ब्यूरो (आईबी)…
भीड़ को नियंत्रित करने के लिए सुरक्षा बलों द्वारा इस्तेमाल की जाने वाली पैलेट गन पर पूरी तरह रोक लगाने की मांग को लेकर सुप्रीम कोर्ट में एक याचिका दायर की गई है। इस याचिका को इंटेलिजेंस ब्यूरो (आईबी) के पूर्व विशेष निदेशक यशोवर्धन आजाद ने दो अन्य पीड़ितों के साथ मिलकर दायर किया है, जो खुद पैलेट गन से घायल हुए थे।
समाचार एजेंसी IANS के अनुसार, याचिकाकर्ताओं ने अदालत से आग्रह किया है कि वह पुलिस और अन्य कानून प्रवर्तन एजेंसियों को भीड़ नियंत्रण के लिए पैलेट गन के इस्तेमाल को खत्म करने का निर्देश दे। उनका तर्क है कि शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों के खिलाफ ऐसे हथियारों का प्रयोग संविधान द्वारा दिए गए मौलिक अधिकारों का उल्लंघन है और यह किसी भी सूरत में तर्कसंगत नहीं है।
याचिका में क्या दलीलें दी गईं?
याचिका में इस बात पर जोर दिया गया है कि पैलेट गन से लोगों को गंभीर और स्थायी शारीरिक क्षति हो सकती है, विशेषकर आंखों की रोशनी जाने का खतरा बना रहता है। याचिकाकर्ताओं का कहना है कि भीड़ को नियंत्रित करने के लिए कई वैकल्पिक और कम घातक तरीके मौजूद हैं, जिनका इस्तेमाल किया जाना चाहिए।
याचिका में कहा गया है कि जब प्रदर्शन शांतिपूर्ण हो, तो पैलेट गन का इस्तेमाल 'आवश्यकता और अनुपातिकता' (necessity and proportionality) के सिद्धांतों के खिलाफ है। यह नागरिकों के जीवन, सुरक्षा और शांतिपूर्ण ढंग से विरोध दर्ज करने के संवैधानिक अधिकारों को सीधे तौर पर प्रभावित करता है।
जंतर-मंतर की घटना और मुआवजे की मांग
याचिका में 20 जुलाई को नई दिल्ली के जंतर-मंतर पर हुए एक प्रदर्शन का भी जिक्र किया गया है। इसमें बताया गया है कि उस दिन पुलिस की कार्रवाई के दौरान कई प्रदर्शनकारी पैलेट लगने से घायल हो गए थे। याचिकाकर्ताओं ने मांग की है कि इस घटना में घायल हुए सभी पीड़ितों को सरकार की ओर से उचित मुआवजा दिया जाए और उनके इलाज की पूरी व्यवस्था सुनिश्चित की जाए।
इनपुट: IANS



