महाराष्ट्र में सूखे पर घिरी सरकार, शिवसेना (UBT) का आरोप - 'किसान चीख रहा, मंत्री सूखे मेवे खा रहे'
महाराष्ट्र में सूखे के संकट को लेकर उद्धव ठाकरे गुट की शिवसेना (UBT) ने राज्य सरकार पर तीखा हमला बोला है। पार्टी ने अपने मुखपत्र 'सामना' के संपादकीय में आरोप लगाया है कि जब किसान सूखे की मार से कराह…
महाराष्ट्र में सूखे के संकट को लेकर उद्धव ठाकरे गुट की शिवसेना (UBT) ने राज्य सरकार पर तीखा हमला बोला है। पार्टी ने अपने मुखपत्र 'सामना' के संपादकीय में आरोप लगाया है कि जब किसान सूखे की मार से कराह रहा है, तब सरकार के मंत्री और नेता सूखे मेवे खाकर डकार ले रहे हैं। समाचार एजेंसी IANS की एक रिपोर्ट के अनुसार, शिवसेना (UBT) ने सरकार के रवैये को असंवेदनशील बताते हुए किसानों के जख्मों पर नमक छिड़कने जैसा करार दिया है।
संपादकीय में कहा गया कि मानसून लौट रहा है और अपने पीछे मराठवाड़ा, उत्तरी महाराष्ट्र और विदर्भ के किसानों के लिए बेहाली और अकाल के हालात छोड़ गया है। लेख में सवाल उठाया गया कि क्या फडणवीस-शिंदे सरकार इस गंभीर स्थिति को लेकर वाकई गंभीर है, क्योंकि आधी से ज़्यादा जनता अकाल की छाया में जी रही है और राज्य में "डर, भूख, प्यास का शैतानी राज आने वाला है।"
नांदेड़ की बैठक और 'काजू-बादाम' विवाद
शिवसेना (UBT) ने नांदेड़ में हुई एक प्रशासनिक बैठक का विशेष रूप से उल्लेख किया। आरोप है कि जब राज्य के कृषि मंत्री दत्तामामा भरणे सूखे का जायजा लेने मराठवाड़ा गए, तो नांदेड़ में विश्राम गृह में हुई बैठक के दौरान मंत्री, विधायक और सांसद काजू-बादाम और सूखे मेवों पर हाथ साफ कर रहे थे। 'सामना' ने इसे शर्मनाक बताते हुए कहा, "किसान सूखे अकाल के कारण चीख-पुकार कर रहा है और सरकार सूखा मेवा खाकर डकार ले रही है।" पार्टी ने सांसद बंडू जाधव द्वारा इस घटना के खुले समर्थन की भी आलोचना की।
मुख्यमंत्री की प्रतिक्रिया पर सवाल
संपादकीय में मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस की प्रतिक्रिया पर भी निशाना साधा गया। फडणवीस के इस बयान का जिक्र किया गया, "ऐसे काजू-बादाम खाना ठीक नहीं है। प्रशासन को संवेदनशील रहना चाहिए। हर चीज की राजनीति करने की विपक्ष को आदत है।" शिवसेना (UBT) ने मुख्यमंत्री पर मामले का ठीकरा प्रशासन पर फोड़ने का आरोप लगाते हुए कहा कि उनसे ऐसी असंवेदनशीलता की उम्मीद नहीं थी। पार्टी ने मुख्यमंत्री के उन आश्वासनों पर भी अविश्वास जताया, जिनमें उन्होंने फसलों के पंचनामे कराकर तुरंत आर्थिक मदद देने की बात कही थी।
किसानों के लिए तत्काल राहत की मांग
'सामना' के माध्यम से शिवसेना (UBT) ने मांग की है कि सरकार को इस गंभीर मुद्दे पर चर्चा के लिए विधानसभा का एक विशेष सत्र बुलाना चाहिए। पार्टी ने शरद पवार की सलाह का हवाला देते हुए राज्य में बिना किसी औपचारिक मानदंड का इंतजार किए तत्काल अकाल घोषित करने का आग्रह किया। इसके अलावा, किसानों के लिए कई राहत उपायों की मांग की गई, जिसमें प्रति हेक्टेयर 50,000 रुपये की मदद, पूरी तरह से एकमुश्त कर्जमाफी, छात्रों की शैक्षणिक फीस माफी और पशुओं के लिए चारा छावनियां शुरू करना शामिल है।
इनपुट: IANS



