पाकिस्तान: इमरान खान की रिहाई की मांग, 27 सितंबर को PTI के प्रदर्शन से बढ़ेगा राजनीतिक तनाव?
पाकिस्तान में एक बार फिर राजनीतिक अस्थिरता का दौर गहराता दिख रहा है, जहाँ निर्वाचित सरकार और सैन्य प्रतिष्ठान के बीच सत्ता के संतुलन का सवाल दशकों से अनसुलझा है। समाचार एजेंसी IANS की एक रिपोर्ट के…
पाकिस्तान में एक बार फिर राजनीतिक अस्थिरता का दौर गहराता दिख रहा है, जहाँ निर्वाचित सरकार और सैन्य प्रतिष्ठान के बीच सत्ता के संतुलन का सवाल दशकों से अनसुलझा है। समाचार एजेंसी IANS की एक रिपोर्ट के मुताबिक, जेल में बंद पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान की पार्टी पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ (PTI) ने 27 सितंबर को एक बड़े विरोध प्रदर्शन का ऐलान किया है। पार्टी का दावा है कि यह प्रदर्शन मौजूदा सत्ता की 'कलई खोलकर रख देगा' और देश में संवैधानिक व्यवस्था की रक्षा के लिए है।
यह प्रदर्शन ऐसे समय में हो रहा है जब पाकिस्तान के राजनीतिक संकट पर विशेषज्ञ चिंता जता रहे हैं। प्रेसेंजा इंटरनेशनल प्रेस एजेंसी में प्रकाशित एक लेख में सामाजिक नीति विशेषज्ञ क्रिसौला एस्टरियाडू ने कहा कि 1977 के सैन्य तख्तापलट के लगभग पांच दशक बाद भी पाकिस्तान यह तय नहीं कर पाया है कि अंतिम राजनीतिक शक्ति किसके पास होनी चाहिए — जनता द्वारा चुनी गई राजनीतिक संस्थाओं के पास या सैन्य प्रतिष्ठान के पास, जिसका प्रभाव संवैधानिक दायरे से कहीं आगे तक फैला हुआ है।
विरोध प्रदर्शन और सरकार की कार्रवाई
27 सितंबर को होने वाले इस प्रदर्शन से पहले सरकार की ओर से सख्ती के संकेत भी मिल रहे हैं। डॉन अखबार के अनुसार, लाहौर के डिप्टी कमिश्नर ने पंजाब मेंटेनेंस ऑफ पब्लिक ऑर्डर ऑर्डिनेंस, 1960 के तहत इमरान खान की बहनों उजमा खान और नोरीन नियाजी को 30 दिनों की हिरासत में लेने का आदेश दिया है। इससे पहले रविवार को उनकी एक और बहन अलीमा खान को भी इसी तरह के आदेश के तहत 30 दिन के लिए हिरासत में लिया गया था। आदेश में उन्हें सार्वजनिक सुरक्षा और कानून-व्यवस्था के लिए खतरा बताया गया है।
प्रदर्शन का उद्देश्य और PTI का पक्ष
PTI नेताओं ने 13 सितंबर को एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में साफ किया था कि यह प्रदर्शन और लॉन्ग मार्च सिर्फ इमरान खान की रिहाई के लिए नहीं है, बल्कि इसका बड़ा मकसद लोकतंत्र की बहाली, संविधान की सर्वोच्चता और कानून का शासन सुनिश्चित करना है। पार्टी नेताओं हारिस तौरो, शाहिद अनवर, और रियाजुर रहमान समेत अन्य ने देश के गंभीर राजनीतिक और आर्थिक संकट का हवाला देते हुए दावा किया कि सत्तारूढ़ अभिजात वर्ग के कुछ सदस्य भी मान चुके हैं कि मौजूदा व्यवस्था विफल हो गई है। PTI ने इमरान खान को राष्ट्रीय एकता का प्रतीक बताते हुए कहा कि केवल वही पाकिस्तान को मौजूदा संकट से बाहर निकाल सकते हैं।
इमरान खान और सैन्य प्रतिष्ठान के रिश्ते
इमरान खान का मामला पाकिस्तान की राजनीति के उसी पुराने विरोधाभास को उजागर करता है, जिसमें नागरिक और सैन्य नेतृत्व के बीच रिश्ते सत्ता के समीकरणों के साथ बदलते रहे हैं। विश्लेषकों का मानना है कि 2018 में जब इमरान खान प्रधानमंत्री बने थे, तो उन्हें सैन्य प्रतिष्ठान का समर्थन हासिल था, हालांकि खान और उनकी पार्टी हमेशा इन आरोपों से इनकार करते रहे। बाद में उनके और सैन्य नेतृत्व के बीच संबंध खराब हो गए। रिपोर्ट के अनुसार, यह घटनाक्रम पाकिस्तान की उस राजनीतिक व्यवस्था को दर्शाता है जहाँ हितों के मेल पर नागरिक-सैन्य अभिजात वर्ग साथ होते हैं और संतुलन बिगड़ने पर टकराव होता है।
इनपुट: IANS



