बुधवार, 12 अगस्त 2026 · नई दिल्ली
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कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों और वैश्विक तनाव ने थामी बाजार की रफ्तार, सेंसेक्स-निफ्टी में गिरावट

सप्ताह के तीसरे कारोबारी दिन, बुधवार को भारतीय शेयर बाजार में दबाव का माहौल रहा। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव और कच्चे तेल की कीमतों में उछाल के कारण निवेशकों की धारणा प्रभावित हुई…

कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों और वैश्विक तनाव ने थामी बाजार की रफ्तार, सेंसेक्स-निफ्टी में गिरावट
(फोटो: IANS)

सप्ताह के तीसरे कारोबारी दिन, बुधवार को भारतीय शेयर बाजार में दबाव का माहौल रहा। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव और कच्चे तेल की कीमतों में उछाल के कारण निवेशकों की धारणा प्रभावित हुई, जिसके चलते सेंसेक्स और निफ्टी दोनों प्रमुख सूचकांकों में गिरावट दर्ज की गई। समाचार एजेंसी IANS की एक रिपोर्ट के अनुसार, शुरुआती कारोबार में बाजार लगभग सपाट खुला था, लेकिन दिन चढ़ने के साथ ही बिकवाली का दबाव बढ़ता गया।

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बुधवार के कारोबार के दौरान, बीएसई का 30 शेयरों वाला सेंसेक्स एक समय 273 अंक (0.34%) गिरकर 77,881 के निचले स्तर तक पहुंच गया था। इसी तरह, एनएसई का निफ्टी 50 भी 81 अंक (0.33%) टूटकर 24,390 के दिन के निचले स्तर पर आ गया। खबर लिखे जाने तक सेंसेक्स 131 अंक की गिरावट के साथ 78,040 पर और निफ्टी 24,435 के स्तर पर कारोबार कर रहा था।

बाजार पर किन वजहों का रहा असर?

बाजार विशेषज्ञों के मुताबिक, इस गिरावट के पीछे सबसे बड़ी वजह ब्रेंट क्रूड ऑयल की कीमतों का फिर से 89 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंचना है। अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव, विशेषकर होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर ईरान के कड़े रुख ने तेल बाजार में अनिश्चितता बढ़ा दी है। विशेषज्ञों का मानना है कि अगर यह तनाव जारी रहा तो कच्चा तेल महंगा बना रह सकता है, जिसका सीधा असर भारतीय बाजार पर पड़ेगा।

सेक्टरों का हाल और प्रमुख शेयर

बुधवार को बाजार में मिला-जुला रुख देखने को मिला। एक तरफ जहां निफ्टी मेटल (0.86%), पीएसयू बैंक (0.60%) और ऑटो (0.23%) जैसे सेक्टरों में तेजी रही, वहीं दूसरी ओर निफ्टी एफएमसीजी (0.64%), रियल्टी (0.58%), हेल्थकेयर (0.41%) और आईटी (0.38%) जैसे क्षेत्रों में बिकवाली देखी गई। निफ्टी 50 में सबसे ज्यादा गिरने वाले शेयरों में मैक्स हेल्थकेयर, अपोलो हॉस्पिटल, बजाज फिनसर्व और टाटा कंज्यूमर शामिल थे।

अर्थव्यवस्था से मिले सकारात्मक संकेत

हालांकि, वैश्विक चिंताओं के बीच भारतीय अर्थव्यवस्था को लेकर कुछ सकारात्मक खबरें भी हैं। हाल ही में आई एसबीआई रिसर्च की एक रिपोर्ट में वित्त वर्ष 2026-27 के लिए भारत की जीडीपी वृद्धि दर 8% रहने का अनुमान लगाया गया है, जो आरबीआई के 6.7% के अनुमान से काफी ज्यादा है। विश्लेषकों का मानना है कि अगर अर्थव्यवस्था इस दर से बढ़ती है तो यह कंपनियों की आय और शेयर बाजार के लिए एक मजबूत सकारात्मक संकेत होगा।

इनपुट: IANS

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