सोमवार, 28 सितम्बर 2026 · नई दिल्ली
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मतदाता सूची पर सियासी संग्राम: भाजपा ने SIR को देशहित में बताया, विपक्ष ने लोकतंत्र के लिए खतरा

मतदाता सूची की समीक्षा (एसआईआर) की प्रक्रिया को लेकर सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच तीखी बहस छिड़ गई है। भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने इस प्रक्रिया को देशहित में और घुसपैठियों को बाहर निकालने के लिए…

मतदाता सूची पर सियासी संग्राम: भाजपा ने SIR को देशहित में बताया, विपक्ष ने लोकतंत्र के लिए खतरा
(फोटो: IANS)

मतदाता सूची की समीक्षा (एसआईआर) की प्रक्रिया को लेकर सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच तीखी बहस छिड़ गई है। भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने इस प्रक्रिया को देशहित में और घुसपैठियों को बाहर निकालने के लिए जरूरी बताया है, वहीं कांग्रेस और अन्य विपक्षी दलों ने इसे 'वोटों की चोरी' और लोकतंत्र को खत्म करने की साजिश करार दिया है। समाचार एजेंसी IANS की एक रिपोर्ट के अनुसार, दोनों पक्षों के नेताओं ने इस मुद्दे पर अपनी-अपनी दलीलें पेश की हैं।

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भाजपा का पक्ष: घुसपैठियों पर लगाम के लिए जरूरी

भाजपा नेताओं ने एसआईआर प्रक्रिया का पुरजोर बचाव किया है। छत्तीसगढ़ के राजनांदगांव से सांसद संतोष पांडे ने पश्चिम बंगाल और बिहार का उदाहरण देते हुए कहा, "एसआईआर देशहित में है और जरूरी है। क्या घुसपैठियों को देश से बाहर नहीं निकाला जाना चाहिए? क्या बांग्लादेशियों और रोहिंग्याओं को इस देश में रहने दिया जाना चाहिए?" उन्होंने इस प्रक्रिया के विरोध को गलत ठहराते हुए कहा कि अगर कोई व्यक्ति एक शहर से दूसरे शहर में बसता है तो उसका नाम नई जगह पर जोड़ा जाना स्वाभाविक है। वहीं, केरल भाजपा अध्यक्ष राजीव चंद्रशेखर ने आरोप लगाया कि 2014 से पहले कांग्रेस वोटर लिस्ट में हेरफेर करके चुनाव जीतती थी। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी अब अपनी हार का ठीकरा एसआईआर पर फोड़ रहे हैं।

विपक्ष का आरोप: लोकतंत्र पर हमला

विपक्षी खेमे ने एसआईआर को लोकतंत्र के लिए एक गंभीर खतरा बताया है। राजस्थान के पूर्व मुख्यमंत्री और वरिष्ठ कांग्रेस नेता अशोक गहलोत ने कहा, "डेढ़ साल पहले राहुल गांधी ने उन्हें चेतावनी दी थी कि यह एसआईआर और वोटों की चोरी लोकतंत्र को खत्म कर देगी।" कांग्रेस नेता उदित राज ने भी राहुल गांधी के बयान का समर्थन करते हुए कहा कि जब एसआईआर के जरिए वोट हटाए जाते हैं और ईवीएम का दुरुपयोग होता है, तो सत्ता में बैठे लोगों को जनता का डर नहीं रहता। उन्होंने बंगाल में 38 लाख मतदाताओं के नाम हटाए जाने का दावा किया।

आंदोलन की चेतावनी और प्रक्रिया रोकने की मांग

विवाद बढ़ने के साथ ही विपक्षी दलों ने इस प्रक्रिया को तत्काल रोकने की मांग की है। सीपीआई(एमएल) के राष्ट्रीय महासचिव दीपांकर भट्टाचार्य ने कहा, "एसआईआर को तुरंत रोका जाना चाहिए; जिन 13 करोड़ वोटरों को हटाया गया है, उन्हें वापस शामिल किया जाना चाहिए और ज्ञानेश कुमार को हटाया जाना चाहिए।" उन्होंने चेतावनी दी कि यदि 30 तारीख तक फैसला नहीं होता है, तो 'इंडिया' गठबंधन और अन्य भाजपा-विरोधी दल एक बड़ा राष्ट्रीय आंदोलन शुरू करेंगे। इसी तरह, कांग्रेस नेता दानम नागेंद्र ने कहा कि एसआईआर एक बड़ी साजिश है और चुनाव आयोग को किसी का मौलिक अधिकार छीनने का हक नहीं है।

इनपुट: IANS

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News4Social राजनीति डेस्क

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