चुनाव आयोग में 'सामूहिक निर्णय' की मांग, मुख्य चुनाव आयुक्त के अधिकारों पर सुप्रीम कोर्ट में याचिका
भारत के चुनाव आयोग (ECI) के कामकाज और मुख्य चुनाव आयुक्त की शक्तियों को लेकर सुप्रीम कोर्ट में एक याचिका दायर की गई है। याचिका में सवाल उठाया गया है कि क्या मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार…
भारत के चुनाव आयोग (ECI) के कामकाज और मुख्य चुनाव आयुक्त की शक्तियों को लेकर सुप्रीम कोर्ट में एक याचिका दायर की गई है। याचिका में सवाल उठाया गया है कि क्या मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार अकेले उन शक्तियों का इस्तेमाल कर सकते हैं, जो संवैधानिक रूप से पूरे आयोग को सौंपी गई हैं। समाचार एजेंसी IANS के अनुसार, यह याचिका समाजसेवी राकेश कुमार सिंह ने दायर की है, जिसमें आयोग में सामूहिक निर्णय लेने की प्रक्रिया को सख्ती से लागू करने की मांग की गई है।
याचिकाकर्ता ने संविधान के अनुच्छेद 32 के तहत यह रिट याचिका दाखिल की है। इसमें कहा गया है कि संविधान का अनुच्छेद 324 चुनावों के अधीक्षण, निर्देशन और नियंत्रण का अधिकार किसी एक व्यक्ति को नहीं, बल्कि पूरे 'आयोग' को देता है। याचिका में इस बात पर जोर दिया गया है कि यह मामला किसी व्यक्ति विशेष के भविष्य से नहीं, बल्कि चुनाव आयोग की अपनी संवैधानिक पहचान से जुड़ा है।
आपत्तियों और विवादों का हवाला
याचिका में दो चुनाव आयुक्तों, सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी द्वारा दर्ज की गई आपत्तियों का जिक्र किया गया है। रिपोर्ट के मुताबिक, दोनों आयुक्तों ने अक्टूबर 2025 से अगस्त 2026 के बीच लिए गए फैसलों और कदमों पर कम से कम 14 बार अपनी असहमति जताई थी, जो कथित तौर पर उनकी मंजूरी के बिना ECI के नाम पर लिए गए थे।
इन आपत्तियों में कई गंभीर मुद्दे शामिल हैं, जैसे:
- आयोग की मंजूरी के बिना आदेश जारी करना।
- बैठकों से पहले एजेंडा और बाद में कार्यवृत्त (minutes) का अभाव।
- बिना सहमति के विदेश यात्रा।
- फॉर्म 6 में बदलाव और मतदाता सूची डेटाबेस तक पहुंच।
- पश्चिम बंगाल में एक ट्रिब्यूनल के समक्ष अपील दायर करना।
इसके अलावा, याचिका में मतदाता सूची डेटाबेस के धीरे-धीरे केंद्रीकरण और ECI के आईटी विभाग के काम में बदलाव को लेकर भी दोनों आयुक्तों द्वारा कथित तौर पर जताई गई चिंताओं का उल्लेख है।
याचिका में क्या मांग की गई है?
याचिकाकर्ता ने सुप्रीम कोर्ट से 'क्यू वारंट' (अधिकार-पृच्छा) रिट जारी करने की मांग की है, ताकि यह स्पष्ट हो सके कि CEC ज्ञानेश कुमार ने किस अधिकार के तहत आयोग के नाम पर काम किया। याचिका में यह भी मांग की गई है कि ECI को विवादित फैसलों से जुड़े सभी रिकॉर्ड, जैसे मीटिंग के मिनट्स, फाइल नोटिंग और मंजूरी की शीट, अदालत में पेश करने का निर्देश दिया जाए।
हालांकि, याचिका में यह स्पष्ट किया गया है कि इसका उद्देश्य हर एक कदम की वैधता तय करना नहीं है, बल्कि यह सुनिश्चित करना है कि आयोग का कामकाज संवैधानिक और कानूनी ढांचे के अनुसार सामूहिक रूप से चले। उधर, इन विवादों पर ECI का कहना है कि विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) समेत सभी फैसले सर्वसम्मति से लिए गए थे और आयुक्तों द्वारा उठाए गए मुद्दे सामान्य विचार-विमर्श का हिस्सा थे।
इनपुट: IANS



