शिवसेना (UBT) के 6 सांसदों के शिंदे गुट में विलय का मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंचा, लोकसभा अध्यक्ष कार्यालय को नोटिस
सुप्रीम कोर्ट ने शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) गुट के छह लोकसभा सांसदों के एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाले गुट में विलय को मंजूरी देने के लोकसभा अध्यक्ष के फैसले पर सुनवाई की है। अदालत ने इस मामले में…
सुप्रीम कोर्ट ने शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) गुट के छह लोकसभा सांसदों के एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाले गुट में विलय को मंजूरी देने के लोकसभा अध्यक्ष के फैसले पर सुनवाई की है। अदालत ने इस मामले में लोकसभा अध्यक्ष के कार्यालय और संबंधित छह सांसदों को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है। समाचार एजेंसी IANS के अनुसार, जस्टिस पी.एस. नरसिम्हा और जस्टिस आलोक अराधे की पीठ ने बुधवार को इस याचिका पर सुनवाई की।
हालांकि, अदालत ने फिलहाल लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला के फैसले पर रोक लगाने से इनकार कर दिया है। इस मामले पर अगली सुनवाई अब दो सप्ताह बाद होगी। यह याचिका शिवसेना (यूबीटी) के सांसद अरविंद सावंत ने दायर की है, जिसमें उन्होंने लोकसभा अध्यक्ष के निर्णय को चुनौती दी है।
क्या है पूरा मामला?
संसद के मानसून सत्र से ठीक पहले, लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने शिवसेना (यूबीटी) के छह सांसदों के शिंदे गुट में विलय को दलबदल संबंधी प्रावधानों के तहत मान्यता दे दी थी। इस फैसले के बाद लोकसभा में उद्धव ठाकरे गुट के सांसदों की संख्या घटकर केवल तीन रह गई है। याचिकाकर्ता की ओर से अदालत में दलील दी गई कि इस विलय से संसद में एक राजनीतिक दल के रूप में शिवसेना (यूबीटी) का कामकाज प्रभावित हुआ है।
दोनों पक्षों की प्रतिक्रियाएं
इस विलय को लेकर दोनों शिवसेना गुटों के बीच तीखी बयानबाजी भी हुई। शिवसेना (यूबीटी) के नेता संजय राउत ने कहा, "ये बागी नहीं बल्कि गद्दार हैं। भगत सिंह और सुखदेव जैसे क्रांतिकारी बागी थे। सोमवार को सड़कों पर उतरे छात्र भी बागी थे, लेकिन जो पैसे लेकर बिक गए, वे गद्दार हैं।" उन्होंने आगे कहा, "अगर हमारे छह सांसद उनके साथ चले गए हैं, तो वे गद्दार हैं। वे 'मंगल मिलन' में शामिल हो रहे हैं। अगर वे किसी असली संघर्ष में शामिल होते, तो मैं उन्हें स्वीकार करता।"
वहीं, शिंदे गुट के नेता संजय निरुपम ने इस कदम का बचाव करते हुए कहा, "छह सांसदों ने कोई गैरकानूनी कदम नहीं उठाया है। कानून उन्हें यह अधिकार देता है कि अगर उनके पास दो-तिहाई बहुमत है तो वे किसी भी पार्टी में शामिल हो सकते हैं।"
इनपुट: IANS



