बुधवार, 9 सितम्बर 2026 · नई दिल्ली
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सत्य निकेतन इमारत हादसा: स्थानीय लोगों में गुस्सा, MCD पर भ्रष्टाचार और लापरवाही के गंभीर आरोप

नई दिल्ली के सत्य निकेतन इलाके में इमारत गिरने की घटना के बाद स्थानीय निवासियों और छात्रों में भारी आक्रोश है। लोगों ने दिल्ली नगर निगम (MCD) के अधिकारियों पर भ्रष्टाचार और लापरवाही के गंभीर आरोप…

सत्य निकेतन इमारत हादसा: स्थानीय लोगों में गुस्सा, MCD पर भ्रष्टाचार और लापरवाही के गंभीर आरोप
(फोटो: IANS)

नई दिल्ली के सत्य निकेतन इलाके में इमारत गिरने की घटना के बाद स्थानीय निवासियों और छात्रों में भारी आक्रोश है। लोगों ने दिल्ली नगर निगम (MCD) के अधिकारियों पर भ्रष्टाचार और लापरवाही के गंभीर आरोप लगाते हुए इस हादसे के लिए उन्हें जिम्मेदार ठहराया है। समाचार एजेंसी IANS की रिपोर्ट के अनुसार, लोगों का कहना है कि अगर समय पर कार्रवाई होती तो यह हादसा टाला जा सकता था।

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हादसे के बाद MCD ने गिरी हुई इमारत के बगल वाली बिल्डिंग को भी तोड़ने की कार्रवाई शुरू कर दी है। लेकिन स्थानीय लोगों का कहना है कि यह कदम बहुत देर से उठाया गया है। एक छात्र ने एजेंसी से कहा, "नोटिस एक महीने पहले दिया गया था, इसके बाद कोई कार्रवाई नहीं की गई। हादसे के बाद ही एक्शन लिया जाता है।"

लोगों और छात्रों ने क्या कहा?

लोगों ने अपनी प्रतिक्रियाओं में व्यवस्था पर सवाल उठाए हैं। एक छात्रा ने अपनी चिंता जताते हुए कहा, "इस हादसे के बाद डर लगता है, क्योंकि यह घटना बड़ी थी। हमारी सरकार से यही मांग है कि सुरक्षा रखी जानी चाहिए।" वहीं, एक अन्य छात्र ने MCD अधिकारियों पर भ्रष्टाचार का आरोप लगाते हुए कहा, "कुछ पैसों के चक्कर में छात्रों की जान से खिलवाड़ की जाती है। अभी एमसीडी कमिश्नर को अपना इस्तीफा दे देना चाहिए और पीजी माफियाओं पर सख्त कार्रवाई होनी चाहिए।"

एक स्थानीय महिला ने भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए ठोस कदम उठाने की मांग की। उन्होंने कहा, "हमारा मानना है कि जितनी भी अवैध और जर्जर इमारतें हैं, उन्हें सील किया जाए और तोड़ा जाए। अन्यथा भविष्य में ऐसी घटनाएं फिर होंगी और बच्चे दबेंगे।" उन्होंने यह भी बताया कि हादसे के बाद कई छात्र बेघर हो गए हैं और उन्हें खाने के लिए गुरुद्वारे जाना पड़ रहा है।

प्रशासन की कार्रवाई पर सवाल

एक स्थानीय नागरिक ने अवैध निर्माण के समय अधिकारियों की चुप्पी पर सवाल उठाते हुए कहा, "आज इन इमारतों को गिराया जा रहा है, लेकिन जब ये बनती हैं, तब कोई नहीं आता है। असलियत यह है कि कानून सिर्फ किताबों में सिमट कर रह गया है।" उनका मानना है कि अब अधिकारी अपनी जान बचाने के लिए सर्वे करने में लगे हैं। इस बीच, एक अन्य व्यक्ति ने बताया कि उन्हें बगल की इमारत तोड़े जाने की जानकारी मौके पर बैरिकेडिंग देखकर ही मिली।

इनपुट: IANS

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News4Social दिल्ली डेस्क

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