NEET-NET विवाद: छात्रों पर FIR और परीक्षा में धांधली को लेकर संसद में चर्चा की मांग, कांग्रेस सांसदों ने दिया स्थगन प्रस्ताव
परीक्षाओं में कथित धांधली और विरोध कर रहे छात्रों पर FIR को लेकर संसद में बहस की मांग तेज हो गई है। समाचार एजेंसी IANS के अनुसार, कांग्रेस के दो सांसदों—मणिक्कम टैगोर बी और हिबी ईडन—ने बुधवार को…
परीक्षाओं में कथित धांधली और विरोध कर रहे छात्रों पर FIR को लेकर संसद में बहस की मांग तेज हो गई है। समाचार एजेंसी IANS के अनुसार, कांग्रेस के दो सांसदों—मणिक्कम टैगोर बी और हिबी ईडन—ने बुधवार को लोकसभा में स्थगन प्रस्ताव का नोटिस देकर इन मुद्दों पर तत्काल चर्चा कराने की मांग की है।
सांसदों ने NEET-UG 2026 और UGC-NET परीक्षाओं में गड़बड़ियों से लाखों छात्रों के भविष्य पर मंडरा रहे संकट और दिल्ली में प्रदर्शनकारी छात्रों के खिलाफ दर्ज की गई FIR को लेकर केंद्र सरकार की विफलता पर चिंता जताई है।
सांसदों ने पत्र में क्या कहा?
लोकसभा अध्यक्ष को लिखे अपने पत्र में सांसद मणिक्कम टैगोर ने कहा कि NEET-UG और UGC-NET में पेपर लीक व अनियमितताओं के कारण एक गंभीर संकट पैदा हो गया है। उन्होंने लिखा कि इस वजह से छात्रों की जानें गईं और 23 लाख से अधिक उम्मीदवारों का भविष्य दांव पर लग गया। उन्होंने इसे केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय और राष्ट्रीय परीक्षण एजेंसी (NTA) की "घोर विफलता" बताया।
वहीं, सांसद हिबी ईडन ने अपने पत्र में संसद के पास प्रदर्शन कर रहे छात्रों के खिलाफ पुलिस की कार्रवाई पर ध्यान केंद्रित किया। उन्होंने लिखा, "यह सदन हजारों छात्रों पर लाठीचार्ज और आंसू गैस के इस्तेमाल की परेशान करने वाली खबरों पर मूकदर्शक बनकर नहीं रह सकता।" उन्होंने कहा कि शांतिपूर्ण ढंग से न्याय मांग रहे छात्रों के खिलाफ दिल्ली पुलिस ने "जरूरत से अधिक और गैर-कानूनी बल प्रयोग" किया।
सरकार की विफलता और छात्रों पर कार्रवाई
दोनों सांसदों ने इस बात पर जोर दिया कि NTA अधिकारियों की संलिप्तता के साथ NEET-UG 2026 में पेपर लीक की पुष्टि हुई, जिसके चलते परीक्षा रद्द कर दोबारा करानी पड़ी। इसी तरह की गड़बड़ियां UGC-NET में भी सामने आईं, जिससे राष्ट्रीय परीक्षा संस्थाओं की विश्वसनीयता पर सवाल खड़े हुए हैं।
मणिक्कम टैगोर ने इस बात का भी उल्लेख किया कि तनाव और अनिश्चितता के कारण कई छात्रों के आत्महत्या करने की खबरें आई हैं। उन्होंने कहा कि केंद्रीय शिक्षा मंत्री ने खुद "संस्थागत विफलता" को स्वीकार किया है, लेकिन नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए इस्तीफा देने से इनकार कर दिया है। सांसदों ने आरोप लगाया कि जब छात्र और नागरिक समाज के लोग शांतिपूर्ण मार्च कर रहे थे, तो उन पर बल प्रयोग किया गया और FIR दर्ज कर उनके लोकतांत्रिक विरोध को अपराधीकरण का रूप दिया गया।
स्थगन प्रस्ताव में रखी गईं मांगें
सांसदों ने सदन की सामान्य कार्यवाही रोककर कुछ प्रमुख मांगों पर चर्चा की मांग की है:
- शिक्षा मंत्री का इस्तीफा: केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान परीक्षा की शुचिता बनाए रखने में विफलता की नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए तत्काल इस्तीफा दें।
- संसद में चर्चा: परीक्षा में हुई अनियमितताओं और सरकार की विफलता पर संसद में पूरी और समयबद्ध चर्चा हो।
- FIR वापसी: दिल्ली में प्रदर्शन कर रहे छात्रों के खिलाफ दर्ज सभी FIR तुरंत वापस ली जाएं और भविष्य में शांतिपूर्ण विरोध पर कोई दंडात्मक कार्रवाई न करने का आश्वासन दिया जाए।
हिबी ईडन ने कहा कि यह मामला "देश की अंतरात्मा को झकझोर" देने वाला है और छात्रों के संवैधानिक अधिकारों की रक्षा के लिए इस पर तत्काल चर्चा आवश्यक है।
इनपुट: IANS



