गुरूवार, 30 जुलाई 2026 · नई दिल्ली
राजनीति

'एक देश-एक चुनाव' बिल मानसून सत्र में नहीं आएगा, संसदीय समिति को रिपोर्ट के लिए और समय मिला

केंद्र सरकार का महत्वाकांक्षी 'एक देश, एक चुनाव' विधेयक संसद के मौजूदा मानसून सत्र में पेश नहीं किया जाएगा। समाचार एजेंसी IANS के अनुसार, इस प्रस्तावित संविधान संशोधन की गहन जांच कर रही संयुक्…

'एक देश-एक चुनाव' बिल मानसून सत्र में नहीं आएगा, संसदीय समिति को रिपोर्ट के लिए और समय मिला
(फोटो: IANS)

केंद्र सरकार का महत्वाकांक्षी 'एक देश, एक चुनाव' विधेयक संसद के मौजूदा मानसून सत्र में पेश नहीं किया जाएगा। समाचार एजेंसी IANS के अनुसार, इस प्रस्तावित संविधान संशोधन की गहन जांच कर रही संयुक्त संसदीय समिति (JPC) का कार्यकाल बढ़ा दिया गया है, जिसके चलते इस पर आगे की प्रक्रिया फिलहाल टल गई है।

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समिति को अब अपनी रिपोर्ट संसद के शीतकालीन सत्र के आखिरी सप्ताह के पहले दिन तक सौंपनी होगी। सूत्रों ने बताया कि जेपीसी को सभी हितधारकों से परामर्श करने और विधेयक के हर पहलू का बारीकी से अध्ययन करने के लिए अतिरिक्त समय की आवश्यकता थी, इसी वजह से उसका कार्यकाल बढ़ाया गया है।

क्या है 'वन नेशन, वन इलेक्शन' विधेयक?

इस विधेयक का मुख्य उद्देश्य लोकसभा, सभी राज्यों की विधानसभाओं और स्थानीय निकायों के चुनाव एक साथ आयोजित कराना है। सरकार का मानना है कि इस कदम से चुनावों पर होने वाले भारी खर्च में कमी आएगी। इसके अलावा, बार-बार चुनाव आचार संहिता लागू होने से रुकने वाले विकास कार्यों में निरंतरता बनी रहेगी और प्रशासनिक मशीनरी पर बोझ भी कम होगा।

विधेयक की अब तक की यात्रा

इस विधेयक को पिछले साल संसद में पेश किया गया था, जिसके बाद इसे विस्तृत जांच के लिए एक संयुक्त संसदीय समिति को सौंप दिया गया था। इस समिति में सत्ता पक्ष और विपक्ष, दोनों के सांसद शामिल हैं। अपनी जांच के दौरान जेपीसी ने चुनाव आयोग, विधि आयोग, विभिन्न राजनीतिक दलों और संवैधानिक विशेषज्ञों सहित कई पक्षों के साथ बैठकें कर उनके सुझाव लिए हैं।

विपक्ष की चिंताएं

कई विपक्षी दलों ने इस विधेयक को लेकर गंभीर आपत्तियां जताई हैं। उनका तर्क है कि एक साथ चुनाव कराने से राष्ट्रीय मुद्दों के सामने क्षेत्रीय मुद्दे दब सकते हैं, जिससे क्षेत्रीय दलों को नुकसान होगा। इसके अलावा, यह कदम देश के संघीय ढांचे को भी प्रभावित कर सकता है। वहीं, सरकार का कहना है कि यह सुधार लोकतंत्र को मजबूत करेगा और देश के संसाधनों की बचत करेगा। जेपीसी की रिपोर्ट आने के बाद ही इस पर आगे की संसदीय प्रक्रिया शीतकालीन सत्र में शुरू हो सकेगी।

इनपुट: IANS

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News4Social राजनीति डेस्क

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