अदन की खाड़ी में भारतीय नौसेना का पहरा, व्यापारिक जहाजों के लिए बन रही है सुरक्षा कवच
दुनिया के सबसे व्यस्त और संवेदनशील समुद्री व्यापार मार्गों में से एक, अदन की खाड़ी में भारतीय नौसेना अपने युद्धपोतों की निरंतर तैनाती से व्यापारिक जहाजों की सुरक्षा सुनिश्चित कर रही है। समाचार एजेंसी…
दुनिया के सबसे व्यस्त और संवेदनशील समुद्री व्यापार मार्गों में से एक, अदन की खाड़ी में भारतीय नौसेना अपने युद्धपोतों की निरंतर तैनाती से व्यापारिक जहाजों की सुरक्षा सुनिश्चित कर रही है। समाचार एजेंसी IANS की एक रिपोर्ट के अनुसार, समुद्री डकैती के खतरों से निपटने और हिंद महासागर क्षेत्र में भारत के समुद्री हितों की रक्षा के लिए यह सक्रियता बेहद महत्वपूर्ण है। इस इलाके से बड़ी मात्रा में ऊर्जा, खाद्यान्न और अन्य आवश्यक वस्तुओं की ढुलाई होती है।
साल 2008 से भारतीय नौसेना इस क्षेत्र में समुद्री डकैती रोधी अभियान चला रही है। अब तक, नौसेना ने अफ्रीका के पूर्वी तट और अदन की खाड़ी में लगभग 4,000 व्यापारिक जहाजों और हजारों नाविकों की सुरक्षित आवाजाही सुनिश्चित की है। यह अभियान न केवल समुद्री लूटपाट को रोकता है, बल्कि वैश्विक व्यापार के लिए एक सुरक्षित माहौल भी तैयार करता है।
हालिया सफल अभियान
नौसेना की मुस्तैदी के कई उदाहरण हाल ही में देखने को मिले हैं। कुछ समय पहले, अदन की खाड़ी में तैनात युद्धपोत ‘आईएनएस त्रिकंद’ ने व्यापारिक जहाज एमवी गोल्डन आर्सेनल पर समुद्री डकैती के एक प्रयास को विफल करते हुए तत्काल कार्रवाई की थी। नौसेना की टीम ने जहाज पर पहुँचकर पूरी तलाशी ली और यह सुनिश्चित किया कि कोई संदिग्ध व्यक्ति मौजूद नहीं है, जिसके बाद जहाज अपनी आगे की यात्रा पर रवाना हो सका। इस अभियान में हवाई निगरानी के लिए नौसेना के पी-8आई समुद्री गश्ती विमान का भी इस्तेमाल किया गया था।
एक अन्य घटना में, नौसेना के आईएनएस त्रिशूल और आईएनएस आदित्य ने कच्चे तेल से लदे दो टैंकरों, एमटी कम्पास और एमटी थालत्ता, को बाब-अल-मंदेब जलडमरूमध्य के संवेदनशील क्षेत्र से सुरक्षित पार कराया। यह जलडमरूमध्य लाल सागर को अदन की खाड़ी और हिंद महासागर से जोड़ता है, जो ऊर्जा आपूर्ति के लिए एक अहम मार्ग है।
व्यापक समुद्री सुरक्षा
भारतीय नौसेना के अनुसार, इस तरह के संवेदनशील इलाकों में लगातार निगरानी रखी जाती है। जरूरत पड़ने पर संदिग्ध गतिविधियों की जाँच करने से लेकर संकट में फँसे जहाजों की मदद करने तक, नौसेना हर स्थिति के लिए तैयार रहती है। अदन की खाड़ी जैसे महत्वपूर्ण समुद्री मार्गों में भारतीय नौसेना की मजबूत उपस्थिति, इस क्षेत्र में एक भरोसेमंद सुरक्षा प्रदाता के रूप में भारत की बढ़ती समुद्री क्षमता को भी रेखांकित करती है। इसका व्यापक उद्देश्य समुद्र में स्वतंत्र और सुरक्षित आवाजाही को बढ़ावा देना और अंतरराष्ट्रीय व्यापार की सुरक्षा करना है।
इनपुट: IANS



