गुरूवार, 10 सितम्बर 2026 · नई दिल्ली
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भारत का 'समुद्र मंथन मिशन': गहरे समुद्र में तेल-गैस की खोज के लिए 8 अरब डॉलर की योजना, ऑयल इंडिया निभाएगा अहम भूमिका

भारत अपनी ऊर्जा ज़रूरतों के लिए आयात पर निर्भरता कम करने और आत्मनिर्भर बनने की दिशा में एक बड़ी छलांग लगाने की तैयारी कर रहा है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा घोषित 'समुद्र मंथन मिशन' इस…

भारत का 'समुद्र मंथन मिशन': गहरे समुद्र में तेल-गैस की खोज के लिए 8 अरब डॉलर की योजना, ऑयल इंडिया निभाएगा अहम भूमिका
(फोटो: IANS)

भारत अपनी ऊर्जा ज़रूरतों के लिए आयात पर निर्भरता कम करने और आत्मनिर्भर बनने की दिशा में एक बड़ी छलांग लगाने की तैयारी कर रहा है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा घोषित 'समुद्र मंथन मिशन' इस महत्वाकांक्षी योजना का केंद्र है, जिसका उद्देश्य भारत के विशाल समुद्री क्षेत्रों में गहरे पानी के नीचे छिपे तेल और गैस के भंडारों की खोज करना है। समाचार एजेंसी IANS की एक रिपोर्ट के मुताबिक, इस मिशन के तहत सरकार ने लगभग 8 अरब अमेरिकी डॉलर का एक व्यापक कोष तैयार किया है।

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इस मिशन के अंतर्गत, भारत के पूर्वी और पश्चिमी तटों के साथ-साथ अंडमान बेसिन जैसे रणनीतिक क्षेत्रों को मिलाकर लगभग 10 लाख वर्ग किलोमीटर का समुद्री इलाका अन्वेषण के लिए खोला जा रहा है। स्वतंत्रता दिवस पर प्रधानमंत्री ने इस पहल की घोषणा की थी, जो देश की ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत करने में एक महत्वपूर्ण कदम साबित हो सकती है।

डेटा अधिग्रहण और तकनीकी नवाचार पर ज़ोर

ऑयल इंडिया लिमिटेड (OIL) के अध्यक्ष एवं प्रबंध निदेशक (CMD) डॉ. रंजीत रथ ने बताया कि कुल 8 अरब डॉलर के फंड में से लगभग 2.4 अरब डॉलर विशेष रूप से डेटा इकट्ठा करने पर खर्च किए जाएंगे। गहरे समुद्री क्षेत्रों (डीपवाटर और अल्ट्रा-डीपवाटर) में तेल और गैस की मौजूदगी का सटीक आकलन करने के लिए उच्च गुणवत्ता वाले भूवैज्ञानिक और भूभौतिकीय डेटा जुटाना बेहद ज़रूरी है। यह निवेश भविष्य के खोज अभियानों के लिए एक ठोस आधार तैयार करेगा।

इसी के साथ, सार्वजनिक क्षेत्र की ऊर्जा कंपनी ऑयल इंडिया लिमिटेड अनुसंधान और नवाचार के माध्यम से भी ऊर्जा क्षेत्र में नई संभावनाएं तलाश रही है। डॉ. रथ के अनुसार, कंपनी इस दिशा में भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईटी) गुवाहाटी के साथ मिलकर कई परियोजनाओं पर काम कर रही है। उन्होंने गुरुवार को IANS से बातचीत में इसका ज़िक्र किया।

IIT गुवाहाटी के साथ मिलकर भविष्य की तैयारी

ऑयल इंडिया और आईआईटी गुवाहाटी की साझेदारी में एक खास प्रोजेक्ट बांस से इथेनॉल बनाने की प्रक्रिया को बेहतर बनाने पर केंद्रित है। इसके तहत ऐसे एंजाइम विकसित किए जा रहे हैं जो जैव-ईंधन (bio-fuel) के उत्पादन को और अधिक कुशल बना सकते हैं। डॉ. रंजीत रथ ने कहा, "स्टार्टअप पारिस्थितिकी तंत्र को मजबूत करने और नई तकनीकों को बढ़ावा देने के उद्देश्य से आयोजित एमसी2+ इग्नाइट चैलेंज जैसे कार्यक्रम नवाचार को नई दिशा देने का काम कर रहे हैं। इससे उद्योग और शैक्षणिक संस्थानों के बीच सहयोग भी मजबूत होगा।" यह सहयोग दिखाता है कि भारत पारंपरिक ऊर्जा स्रोतों के साथ-साथ भविष्य के स्वच्छ ऊर्जा विकल्पों पर भी एक दीर्घकालिक रणनीति के साथ काम कर रहा है।

इनपुट: IANS

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