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तमिलनाडु: सलेम के किसान सरकारी सब्सिडी वाले मक्के के बीज से नाखुश, पैदावार आधी से भी कम होने का आरोप

तमिलनाडु के सलेम जिले में मक्का उगाने वाले किसान सरकार द्वारा सब्सिडी पर दिए जा रहे बीजों को लेकर चिंतित हैं। किसानों का आरोप है कि इस किस्म से पैदावार इतनी कम हो रही है कि वे अपनी लागत भी नहीं निकाल…

तमिलनाडु: सलेम के किसान सरकारी सब्सिडी वाले मक्के के बीज से नाखुश, पैदावार आधी से भी कम होने का आरोप
(फोटो: IANS)

तमिलनाडु के सलेम जिले में मक्का उगाने वाले किसान सरकार द्वारा सब्सिडी पर दिए जा रहे बीजों को लेकर चिंतित हैं। किसानों का आरोप है कि इस किस्म से पैदावार इतनी कम हो रही है कि वे अपनी लागत भी नहीं निकाल पा रहे हैं। समाचार एजेंसी IANS की एक रिपोर्ट के अनुसार, किसानों ने या तो बीज की किस्म बदलने या फिर पुरानी सब्सिडी व्यवस्था बहाल करने की मांग की है, जिसमें वे अपनी पसंद के बीज खरीद सकते थे।

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मामला सलेम जिले के अत्तूर, पेथानाइकेनपालयम और वाज़ापाडी जैसे इलाकों का है। किसानों का कहना है कि पिछले सीजन में उन्हें जो बीज उपलब्ध कराए गए, वे यहां की मिट्टी और मौसम के अनुकूल नहीं हैं। सलेम जिला किसान कल्याण संघ के अध्यक्ष वी.एस. गोविंदराज ने बताया कि आमतौर पर बेहतर किस्मों से प्रति एकड़ लगभग 40 बोरी मक्का मिलता है, लेकिन सब्सिडी वाले बीजों से यह आंकड़ा घटकर सिर्फ 15 बोरी रह गया।

पैदावार घटने से भारी नुकसान

किसानों के अनुसार, पहले मक्के की एक सफल फसल से करीब 2 लाख रुपये का मुनाफा हो सकता था, लेकिन अब नई किस्म का उपयोग करने वालों के लिए खर्च निकालना भी मुश्किल हो गया है। ये बीज आमतौर पर 420 रुपये प्रति किलोग्राम के होते हैं, जो सब्सिडी के बाद किसानों को 320 रुपये में दिए जा रहे हैं। कई किसान इस सीजन में दोबारा वही बीज खरीदने से कतरा रहे हैं। गोविंदराज ने यह भी आरोप लगाया कि कुछ किसानों को कथित तौर पर चेतावनी दी जा रही है कि यदि उन्होंने बीज नहीं खरीदे तो उन्हें अन्य सरकारी लाभों से वंचित किया जा सकता है।

कृषि विभाग का पक्ष

हालांकि, कृषि अधिकारियों ने 'एडवांटा 762' नामक इस किस्म का बचाव किया है। उनका कहना है कि केंद्र सरकार ने इसे पांच राज्यों में खेती के लिए मंजूरी दी है और नेशनल सीड्स कॉर्पोरेशन के माध्यम से तमिलनाडु के 20 जिलों में इसका वितरण किया जा रहा है। कृषि विभाग के संयुक्त निदेशक के. श्रीनिवासन ने पिछले साल कम पैदावार के लिए अपर्याप्त बारिश को जिम्मेदार ठहराया। उन्होंने कहा कि अनुकूल परिस्थितियों में यह बीज प्रति एकड़ 3.5 टन तक की पैदावार दे सकता है।

इस सीजन के लिए राज्य ने सलेम जिले को 58 टन सब्सिडी वाले बीज आवंटित किए हैं, जो लगभग 1,866 हेक्टेयर भूमि के लिए पर्याप्त होंगे। अधिकारियों ने यह भी स्पष्ट किया कि वितरण से पहले हर बैच की जांच की गई थी, जिसमें अंकुरण का मानक 90 प्रतिशत पाया गया। किसानों की हिचकिचाहट को देखते हुए विभाग ने एक सस्ती किस्म 'डीएचएम 206' भी उपलब्ध कराई है।

इनपुट: IANS

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News4Social नेशनल डेस्क

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