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साहिबगंज: 14 साल से लंबित पेयजल योजना पर हाईकोर्ट का कड़ा रुख़, सरकार से पूछा- ज़हरीले पानी से कब मिलेगी मुक्ति?

झारखंड के साहिबगंज जिले में भूजल के ज़हरीला होने के बावजूद एक महत्वपूर्ण पेय जलापूर्ति योजना के 14 वर्षों से अधूरी रहने पर झारखंड हाईकोर्ट ने गहरी नाराज़गी जताई है। अदालत ने इस मामले में राज्य सरकार…

साहिबगंज: 14 साल से लंबित पेयजल योजना पर हाईकोर्ट का कड़ा रुख़, सरकार से पूछा- ज़हरीले पानी से कब मिलेगी मुक्ति?
(फोटो: IANS)

झारखंड के साहिबगंज जिले में भूजल के ज़हरीला होने के बावजूद एक महत्वपूर्ण पेय जलापूर्ति योजना के 14 वर्षों से अधूरी रहने पर झारखंड हाईकोर्ट ने गहरी नाराज़गी जताई है। अदालत ने इस मामले में राज्य सरकार से जवाब तलब करते हुए पूछा है कि ग्रामीणों को आर्सेनिक और फ्लोराइड युक्त पानी से कब तक मुक्ति मिलेगी। समाचार एजेंसी IANS की रिपोर्ट के अनुसार, मुख्य न्यायाधीश एमएस सोनक और न्यायमूर्ति राजेश शंकर की खंडपीठ ने इस संबंध में दायर एक जनहित याचिका पर सुनवाई की।

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यह मामला ‘मेधा पेय जलापूर्ति योजना’ से जुड़ा है, जिसे साहिबगंज के ग्रामीण इलाकों में साफ़ पानी मुहैया कराने के लिए साल 2012 में मंजूरी दी गई थी। याचिकाकर्ता सिद्धेश्वर मंडल की ओर से अदालत को बताया गया कि स्वीकृति के लगभग डेढ़ दशक बीत जाने के बाद भी यह योजना ज़मीन पर नहीं उतर पाई है, जबकि क्षेत्र में स्वच्छ पेयजल की गंभीर समस्या बनी हुई है।

प्रदूषित पानी और स्वास्थ्य का खतरा

सुनवाई के दौरान अदालत का ध्यान इस तथ्य पर दिलाया गया कि झारखंड राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की जांच में भी क्षेत्र के भूजल में आर्सेनिक और फ्लोराइड जैसे खतरनाक तत्वों की मौजूदगी की पुष्टि हुई है। इन तत्वों वाला पानी लंबे समय तक पीने से लोगों के स्वास्थ्य पर गंभीर असर पड़ सकता है। याचिका में कहा गया है कि एक तरफ लोग प्रदूषित पानी पीने को मजबूर हैं, तो दूसरी तरफ साफ़ पानी देने वाली सरकारी योजना अटकी पड़ी है।

अदालत का स्पष्ट निर्देश

मामले की गंभीरता को देखते हुए हाईकोर्ट ने गुरुवार को पेयजल एवं स्वच्छता विभाग के प्रधान सचिव को एक विस्तृत जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया। अदालत ने सरकार से न सिर्फ योजना की मौजूदा स्थिति बताने को कहा है, बल्कि यह भी स्पष्ट करने को कहा है कि इसे कब तक पूरा कर लिया जाएगा। मामले की अगली सुनवाई के लिए 24 सितंबर की तारीख तय की गई है।

इनपुट: IANS

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News4Social नेशनल डेस्क

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