सहारनपुर: मस्जिद के मलबे के नीचे 20 फुट गहरा कुआं मिलने से गरमाई सियासत, ASI करेगी जांच
उत्तर प्रदेश के सहारनपुर कलेक्ट्रेट परिसर में गिराई गई एक मस्जिद के मलबे से 20 फुट गहरा कुआं मिलने के बाद यह मामला एक नया मोड़ ले चुका है। समाचार एजेंसी IANS की रिपोर्ट के अनुसार, जिला प्रशासन ने इस…
उत्तर प्रदेश के सहारनपुर कलेक्ट्रेट परिसर में गिराई गई एक मस्जिद के मलबे से 20 फुट गहरा कुआं मिलने के बाद यह मामला एक नया मोड़ ले चुका है। समाचार एजेंसी IANS की रिपोर्ट के अनुसार, जिला प्रशासन ने इस प्राचीन प्रतीत हो रहे कुएं की ऐतिहासिकता और उम्र का पता लगाने के लिए भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) से जांच कराने का फैसला किया है। फिलहाल, लगभग डेढ़ मीटर चौड़े इस कुएं को लोहे की चादर से ढककर पूरे इलाके की बैरिकेडिंग कर दी गई है और भारी पुलिस बल तैनात है।
यह कुआं उस समय सामने आया जब शनिवार को शुरू हुए ध्वस्तीकरण के बाद रविवार सुबह मलबा हटाने का काम चल रहा था। कर्मचारियों को जमीन के नीचे एक भारी स्लैब मिला, जिसे कटर से काटने पर उसके नीचे यह ढांचा दिखाई दिया। कुएं की अनुमानित गहराई 20 फीट बताई गई है और इसके निचले हिस्से में मिट्टी भरी होने की बात सामने आई है।
ASI जांच और मंदिर का दावा
कुआं मिलने के बाद मस्जिद निर्माण की शिकायत करने वाले विकास त्यागी ने दावा किया है कि इस स्थान पर पहले मंदिर था, जिसे तोड़कर मस्जिद का निर्माण किया गया। उन्होंने कहा, "मेरा पहले से शक था। यहां कोई पुराना पूजा का स्थल हो सकता है... इससे मेरा शक सही साबित हुआ है।" हालांकि, प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि कोई भी निष्कर्ष निकालना जल्दबाजी होगी। एसडीएम सदर सुबोध कुमार ने कहा, "कोर्ट के आदेश पर मस्जिद को गिराने की कार्रवाई की गई है। कार्रवाई के दौरान यहां पर कुआं मिला है। एएसआई से इसकी जांच कराई जाएगी। जांच के बाद ही मालूम पड़ेगा कि ये कितना पुराना है।"
राजनीतिक बयानबाज़ी और विपक्ष के सवाल
इस पूरे घटनाक्रम पर राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई है। नगीना से सांसद चंद्रशेखर आजाद ने कार्रवाई की जल्दबाजी पर सवाल उठाते हुए कहा, "इतनी जल्दबाजी क्यों की गई है। क्यों अपील का मौका नहीं दिया गया। हम इस लड़ाई को सदन, न्यायपालिका के पटल और सड़क पर लड़ेंगे।" वहीं, AAP सांसद संजय सिंह ने इसे संविधान और पूजा स्थल अधिनियम का उल्लंघन बताया। उन्होंने कहा, "सहारनपुर में बनी मस्जिद 1911 की थी, जिसे तोड़ दिया गया है... ये लोग प्रदेश में हिंदू और मुसलमानों को लड़ाना चाहते हैं क्योंकि चुनाव में केवल 4 महीने का समय बचा है।" AIMIM के प्रवक्ता वारिस पठान ने भी कार्रवाई की कड़ी निंदा की।
प्रशासन का पक्ष और कार्रवाई का विवरण
प्रशासन के अनुसार, यह दो मंजिला मस्जिद कलेक्ट्रेट परिसर में 315 वर्ग मीटर सरकारी भूमि पर बनी थी और इसे नगर मजिस्ट्रेट की अदालत के आदेश पर हटाया गया है। करीब 16 घंटे तक चले इस अभियान में कई बुलडोजर और डंपर लगाए गए थे। मस्जिद पक्ष के वकील बाबर वसीम ने इस कार्रवाई के खिलाफ हाईकोर्ट जाने की बात कही है। मस्जिद की उम्र को लेकर भी अलग-अलग दावे हैं; मस्जिद पक्ष इसे 100 साल पुराना बता रहा है, जबकि प्रशासन के मुताबिक वक्फ के दस्तावेजों में यह 70 वर्ष पुरानी दर्ज है। इस मामले में अब ASI की जांच रिपोर्ट का इंतजार है, जिससे इस कुएं की ऐतिहासिकता पर से पर्दा उठ सकेगा।
इनपुट: IANS



