सहारनपुर में मस्जिद गिराए जाने पर सियासत: इमरान मसूद ने कहा- अदालत पर भरोसा, असीम वकार ने सरकार पर उठाए सवाल
उत्तर प्रदेश के सहारनपुर में एक मस्जिद को गिराए जाने की कार्रवाई ने राजनीतिक सरगर्मी बढ़ा दी है। इस मामले पर कांग्रेस के दो नेताओं ने अपनी प्रतिक्रिया दी है, जिसमें एक ने कानूनी लड़ाई पर जोर दिया तो…
उत्तर प्रदेश के सहारनपुर में एक मस्जिद को गिराए जाने की कार्रवाई ने राजनीतिक सरगर्मी बढ़ा दी है। इस मामले पर कांग्रेस के दो नेताओं ने अपनी प्रतिक्रिया दी है, जिसमें एक ने कानूनी लड़ाई पर जोर दिया तो दूसरे ने सीधे तौर पर योगी सरकार पर निशाना साधा है। समाचार एजेंसी IANS से मिली जानकारी के अनुसार, कांग्रेस सांसद इमरान मसूद ने इस मुद्दे को पूरी तरह से एक कानूनी लड़ाई बताया है।
इमरान मसूद ने कहा कि अब जब मस्जिद गिरा दी गई है, तो यह लड़ाई अदालत में ही लड़ी जाएगी। उन्होंने कहा, "ये सभी विवाद कागजात और दस्तावेजों से जुड़े हैं। हमारे पास वे दस्तावेज हैं, इसलिए हम अदालत में लड़ेंगे और अदालत का दरवाजा खटखटाएंगे।" मसूद ने न्यायपालिका पर पूरा भरोसा जताते हुए उम्मीद जताई कि अदालत के आदेश पर ही मस्जिद का पुनर्निर्माण होगा। उन्होंने आगे कहा, "हम कोर्ट जाएंगे, अपनी बात रखेंगे और हमारे पास रास्ता क्या है? रास्ता तो यही है ना, रास्ता तो कोर्ट का ही है तो कोर्ट जाएंगे।"
सरकार पर तीखे आरोप
वहीं, लखनऊ में कांग्रेस नेता असीम वकार ने इस कार्रवाई पर कहीं ज़्यादा तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त की। उन्होंने योगी सरकार पर आरोप लगाया कि अब तक प्रदेश में लगभग 270-280 मुस्लिम प्रतिष्ठानों को ध्वस्त किया जा चुका है। वकार के मुताबिक, इनमें 225 मदरसे, 30 मस्जिदें, 25 मजारें और 6 ईदगाह शामिल हैं। उन्होंने सवाल उठाया, "तो क्या आप समझते हैं कि प्रदेश का, देश का हिंदू खुश है?"
'सत्ता बदली तो होगी कार्रवाई'
असीम वकार ने भविष्य की राजनीति का जिक्र करते हुए कहा कि जब भाजपा सरकार जाएगी और इंडिया गठबंधन सत्ता में आएगा, तो वे यह सुनिश्चित करेंगे कि ध्वस्त किए गए मंदिरों का निर्माण उन अधिकारियों की निजी संपत्ति से कराया जाए, जिनके हस्ताक्षर से ये तोड़े गए। उन्होंने कहा, "सारे मंदिर जो इस सरकार ने तोड़े हैं, उनका सवाल उठाया जाएगा।" वकार ने स्पष्ट किया कि यही कानून तोड़ी गई मस्जिदों पर भी लागू होगा और सहारनपुर समेत सभी ध्वस्त की गईं मस्जिदों को दोबारा बनाया जाएगा। उन्होंने इस कार्रवाई को "गैर-संवैधानिक काम" करार दिया।
इनपुट: IANS



