रूस: संसदीय चुनाव में पुतिन की समर्थक पार्टी 'यूनाइटेड रशिया' की बड़ी जीत तय
रूस में हुए संसदीय चुनाव में राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन द्वारा समर्थित 'यूनाइटेड रशिया' पार्टी एक बड़ी जीत की ओर अग्रसर है। समाचार एजेंसी IANS की एक रिपोर्ट के अनुसार, लगभग 90.43% मतपत्रों की गिनती…
रूस में हुए संसदीय चुनाव में राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन द्वारा समर्थित 'यूनाइटेड रशिया' पार्टी एक बड़ी जीत की ओर अग्रसर है। समाचार एजेंसी IANS की एक रिपोर्ट के अनुसार, लगभग 90.43% मतपत्रों की गिनती पूरी हो चुकी है और पार्टी को 57.86% वोट मिले हैं, जिससे उसका बहुमत लगभग तय हो गया है।
यह चुनाव फरवरी 2022 में यूक्रेन के साथ संघर्ष शुरू होने के बाद रूस का पहला संसदीय चुनाव है। राष्ट्रपति पुतिन ने इन चुनावों को यूक्रेन में लड़ रहे रूसी सैनिकों के लिए समर्थन के तौर पर पेश किया था। इस बार मतदान 56.66% रहा, जिसमें मास्को में रिकॉर्ड स्तर पर वोटिंग हुई।
चुनाव परिणाम और अन्य दल
केंद्रीय निर्वाचन आयोग के आंकड़ों का हवाला देते हुए रूसी समाचार एजेंसी TASS ने बताया कि यूनाइटेड रशिया के बाद दूसरे स्थान पर सीआरपीएफ (CRPF) है, जिसे 13.84% वोट मिले हैं। इसके अलावा, एलडीपीआर (LDPR) को 8.9%, न्यू पीपल को 7.94% और 'ए जस्ट रशिया' को 4.95% मत प्राप्त हुए हैं।
विपक्ष और चुनाव की परिस्थितियाँ
इन चुनावों में युद्ध-विरोधी 'याब्लोको' पार्टी को चुनाव लड़ने से रोक दिया गया था, हालांकि इसके कुछ नेताओं को कुछ सीटों पर चुनाव लड़ने की अनुमति मिली। कथित तौर पर कई अन्य सरकार-विरोधी नेताओं और उम्मीदवारों को भी चुनाव में हिस्सा लेने का अवसर नहीं दिया गया। चुनाव के आखिरी दिन, रविवार को, यूक्रेन द्वारा मास्को और आसपास के इलाकों में 1,600 से अधिक ड्रोन भेजने का दावा भी किया गया। मास्को के मेयर सर्गेई सोबयानिन के अनुसार, राजधानी को निशाना बनाकर 450 ड्रोन भेजे गए थे।
स्टेट ड्यूमा और पुतिन का पार्टी से संबंध
स्टेट ड्यूमा रूस की संसद का निचला सदन है, जो भारत की लोकसभा के समान है। इसमें कुल 450 सीटें हैं, जिनमें से 225 सीटों का फैसला पार्टी को मिले वोटों के आधार पर और बाकी 225 का अलग-अलग क्षेत्रों में सीधे चुनाव से होता है। 2021 के पिछले चुनाव में यूनाइटेड रशिया ने 324 सीटें जीती थीं।
दिलचस्प बात यह है कि राष्ट्रपति पुतिन यूनाइटेड रशिया पार्टी के औपचारिक सदस्य नहीं हैं। हालांकि, वह 2008 से 2012 तक इसके अध्यक्ष रह चुके हैं, जिसके बाद दिमित्री मेदवेदेव ने यह पद संभाला था।
इनपुट: IANS



