किसान आंदोलन किस वजह से शुरू हुआ
देश में कई दिनों से बड़े स्तर पर किसान आंदोलन चल रहा है. जिसमें किसानों का आरोप है कि केंद्र सरकार द्वारा कृषि से संबंधित जो तीन कानून बनाए हैं वो पहले से ही…
देश में कई दिनों से बड़े स्तर पर किसान आंदोलन चल रहा है. जिसमें किसानों का आरोप है कि केंद्र सरकार द्वारा कृषि से संबंधित जो तीन कानून बनाए हैं वो पहले से ही बुरे हालातों में जी रहे किसानों को पूरी तरह बर्बाद कर देंगें. जिसके विरोध में कई किसान संगठन इन कानूनों को वापस लेने के लिए दबाव बनाने के लिए आंदोलन कर रहे हैं.

केंद्र सरकार की तरफ से किसानों के हालात सुधारने के लिए तीन कानून बनाए गए. अगर हम पहले कानून की बात करें तो इसके अनुसार किसान अपनी फसल बेचनें में आजादी दी गई है, जिसमें किसानों को एक राज्य से दूसरे राज्यों में अपनी फसल को जहां चाहें बेचनें की आजादी होगी. यदि दूसरे कानून की बात करें तो इसमें Contract Farming यानि की अनुबंध खेती की बात की गई है. जिसमें किसान और कंपनी के बीच में फसल के दामों के बारे में पहले से ही लिखित समझौता होता है. वहीं अगर तीसरे कानून की बात करें तो इसके अनुसार अब कितने भी बड़े स्तर पर खाद्यानों का स्टोर किया जा सकता है. सरकार की तरफ से कहा गया है कि ये कानून किसान की जिंदगी में क्रांतिकारी परिवर्तन लेकर आएंगीं.

इन कानूनों को लेकर किसानों की अपनी अलग शंका है. किसानों का मानना है कि सरकार फसलों का MSP खत्म करना चाहती है. इसके अलावा Contract Farming के द्वारा भोले भाले किसानों की जमीन ह़डप ली जाएगी. वहीं सरकार साफ कर चुकी है कि जमीन पर मालिकाना हक किसान का ही बना रहेगा. इसके साथ ही किसानों का आरोप है कि जमाखोरी से महंगाई भी बढ़ेगी क्योंकि किसान खुद तो स्टोर कर नहीं सकता है. उसके पास इतनी सुविधा नहीं होती है.
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इन तीन कानूनों को लेकर ही किसानों द्वारा आंदोलन शुरू किया गया. इसके साथ ही किसानों के कुछ और भी मुद्दे हैं. जैसे- पराली जलाने पर जुर्माना और बिजली बिल से संबंधित. इसीलिए किसान आंदोलन कर रहे हैं.



