रांची में इंटरनेट बंद: हाईकोर्ट की सख़्ती, सभी ऑपरेटरों से मांगा स्टेटस रिपोर्ट
रांची के कई इलाकों में बिजली के खंभों से तारों का जाल हटाने के दौरान इंटरनेट सेवा ठप होने के मामले में झारखंड हाईकोर्ट ने कड़ा रुख अपनाया है। अदालत ने मामले का स्वतः संज्ञान लेते हुए इसे जनहित याचिका…
रांची के कई इलाकों में बिजली के खंभों से तारों का जाल हटाने के दौरान इंटरनेट सेवा ठप होने के मामले में झारखंड हाईकोर्ट ने कड़ा रुख अपनाया है। अदालत ने मामले का स्वतः संज्ञान लेते हुए इसे जनहित याचिका के रूप में दर्ज किया है। समाचार एजेंसी IANS के अनुसार, मुख्य न्यायाधीश एम.एस. सोनक और न्यायमूर्ति राजेश शंकर की खंडपीठ ने सभी इंटरनेट सेवा प्रदाता कंपनियों से जवाब मांगा है।
गुरुवार को हुई सुनवाई में खंडपीठ ने कंपनियों को बाधित सेवाओं को तत्काल बहाल करने का निर्देश दिया और इस पर एक अनुपालन रिपोर्ट भी मांगी। अदालत ने मौखिक टिप्पणी करते हुए कहा कि आदेश की 'गलतफहमी' (मिसअंडरस्टैंडिंग) के कारण आम लोगों को अनावश्यक परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। यह भी साफ़ किया गया कि तार हटाने की कार्रवाई की वजह से आम लोगों की इंटरनेट सेवा अनिश्चित काल तक बाधित नहीं रखी जा सकती।
सभी ऑपरेटरों से पूछे गए सवाल
अदालत ने BSNL, जियो, एयरटेल और वोडाफोन-आइडिया समेत सभी ऑपरेटरों से पूछा है कि उन्होंने किस तारीख को, किन-किन इलाकों में और कितने इंटरनेट कनेक्शन काटे। साथ ही यह भी बताने को कहा गया है कि अब तक कितने कनेक्शनों को दोबारा बहाल किया जा चुका है। सुनवाई के दौरान झारखंड विद्युत वितरण निगम लिमिटेड (JBVNL) के सीएमडी श्रीनिवासन और सभी प्रमुख टेलीकॉम कंपनियों के वरिष्ठ अधिकारी व्यक्तिगत रूप से अदालत में मौजूद थे।
BSNL अधिकारी को फटकार
सुनवाई के दौरान अदालत ने BSNL के चीफ जनरल मैनेजर (CGM) विपुल अग्रवाल के व्यवहार पर गहरी नाराज़गी व्यक्त की। हाईकोर्ट के एक अधिकारी के फोन पर अनुचित तरीके से बात करने के मामले में CGM को 14 सितंबर तक लिखित और बिना शर्त माफीनामा दाखिल करने का आदेश दिया गया है। वहीं, BSNL और जियो ने अदालत को बताया कि हाईकोर्ट की बाधित इंटरनेट लाइन को ठीक कर दिया गया है और आम नागरिकों के कनेक्शन भी जल्द बहाल कर दिए जाएंगे। इस मामले में अगली सुनवाई 16 सितंबर को होगी।
इनपुट: IANS



