राम मंदिर ट्रस्ट में नए CEO की नियुक्ति पर सियासत, सपा और कांग्रेस के नेताओं ने उठाए सवाल
श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के नए मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO) की नियुक्ति को लेकर राजनीतिक बहस छिड़ गई है। छत्तीसगढ़ के पूर्व उपमुख्यमंत्री टी.एस. सिंह देव ने ट्रस्ट की स्वायत्तता पर…
श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के नए मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO) की नियुक्ति को लेकर राजनीतिक बहस छिड़ गई है। छत्तीसगढ़ के पूर्व उपमुख्यमंत्री टी.एस. सिंह देव ने ट्रस्ट की स्वायत्तता पर चिंता जताई है, वहीं समाजवादी पार्टी की विधायक ने भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) पर निशाना साधा है। समाचार एजेंसी IANS से मिली जानकारी के अनुसार, दोनों नेताओं ने ट्रस्ट के कामकाज में राजनीतिक हस्तक्षेप को लेकर सवाल उठाए हैं।
कांग्रेस नेता टी.एस. सिंह देव ने इस बात पर जोर दिया कि राम मंदिर ट्रस्ट जैसी संस्थाओं को किसी भी राजनीतिक दल या व्यक्ति के प्रभाव से मुक्त होना चाहिए। अंबिकापुर में उन्होंने कहा, "संस्था को स्वायत्त रहना चाहिए और उसके फैसले स्वतंत्र रूप से लिए जाने चाहिए।" उन्होंने कहा कि पदाधिकारियों के नाम से अधिक महत्वपूर्ण उनका काम है। सिंह देव ने यह भी याद दिलाया कि पहले भी ट्रस्ट में बड़े नाम रहे हैं और उनके कार्यकाल में चढ़ावे की चोरी के आरोप लगे थे।
सपा ने लगाए गंभीर आरोप
उधर, जौनपुर से समाजवादी पार्टी की विधायक डॉ. रागिनी सोनकर ने नए CEO जितेंद्र मिश्रा की नियुक्ति पर प्रतिक्रिया देते हुए भाजपा पर धर्म की आड़ में राजनीति करने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि भाजपा विकास के असल सवालों से जनता का ध्यान भटकाने के लिए धार्मिक मुद्दों का इस्तेमाल करती है।
डॉ. सोनकर ने मंदिर में चढ़ावे को लेकर भी गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने दावा किया, "लोगों ने श्रद्धा से जो वस्तुएं और धन मंदिर में अर्पित किया, उसमें चोरी हुई।" सपा विधायक ने आगे आरोप लगाया कि अब चुनाव के दौरान उसी धन का इस्तेमाल योजनाओं के जरिए मतदाताओं को लुभाने के लिए किया जा सकता है, जैसे कि महिलाओं और पुरुषों को पैसे देना या स्कूटी बांटना।
सरकार की मंशा पर सवाल
सपा विधायक ने सरकार की प्राथमिकताओं पर सवाल उठाते हुए कहा कि अगर ये योजनाएं इतनी ही जरूरी थीं तो पिछले साढ़े नौ साल में क्यों नहीं लागू की गईं। उन्होंने बेमौसम बारिश के नाम पर सरकारी स्कूलों को बंद करने के फैसले पर भी सवाल उठाया और आरोप लगाया कि यह युवाओं के संभावित विरोध के डर से किया जा रहा है। उन्होंने सरकार से विकास, शिक्षा और जनता की बुनियादी जरूरतों पर ध्यान केंद्रित करने की मांग की।
इनपुट: IANS



