राम मंदिर ट्रस्ट में बदलाव: चंपत राय के इस्तीफे पर अयोध्या के संतों में मतभेद, कुछ ने समर्थन किया, कुछ ने जांच की मांग उठाई
अयोध्या में श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट में हुए हालिया संगठनात्मक बदलावों ने संत समाज को दो ध्रुवों में बांट दिया है। ट्रस्ट के पूर्व महासचिव चंपत राय के इस्तीफे और चढ़ावे में कथित अनियमितत
अयोध्या में श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट में हुए हालिया संगठनात्मक बदलावों ने संत समाज को दो ध्रुवों में बांट दिया है। ट्रस्ट के पूर्व महासचिव चंपत राय के इस्तीफे और चढ़ावे में कथित अनियमितताओं के आरोपों को लेकर अयोध्या के साधु-संतों की प्रतिक्रियाएं बँटी हुई हैं। कुछ संत चंपत राय के दशकों पुराने योगदान को याद करते हुए उनके समर्थन में खड़े हैं, तो वहीं कई अन्य ने ट्रस्ट के इस कदम का स्वागत करते हुए पूरे मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की है। समाचार एजेंसी IANS की एक रिपोर्ट के अनुसार, इस मुद्दे पर संत समाज में अलग-अलग विचार सामने आ रहे हैं।
समर्थन में उठे स्वर: 'चंपत राय को बलि का बकरा बनाया गया'
चंपत राय के पक्ष में खड़े संतों का मानना है कि उन्होंने अपना पूरा जीवन राम मंदिर आंदोलन के लिए समर्पित कर दिया। बद्रीनाथ के ज्योतिर्मठ के जगद्गुरु स्वामी ओंकारानंद ने कहा, "मैं यह जानना चाहता हूं कि आखिर चंपत राय से इस्तीफा क्यों लिया गया। यदि मंदिर के खजाने से चोरी या अनियमितता हुई है, तो उसकी जवाबदेही संबंधित व्यवस्था संभालने वाले लोगों की भी बनती है।" उन्होंने 1987 से राय के साथ अपने जुड़ाव का जिक्र करते हुए कहा कि राय ने भगवान राम और कारसेवकों की पूरी निष्ठा से सेवा की है। स्वामी ओंकारानंद ने कहा, "यदि उनकी कोई गलती रही भी है, तो वह केवल किसी पर विश्वास करना था, और उनके साथ विश्वासघात हुआ है।"
इसी तरह की भावना व्यक्त करते हुए आर्य संत वरुण दास महाराज ने कहा, "चंपत राय के पत्र से उनके मन का दर्द सामने आया है। ट्रस्ट की प्रेस वार्ता सुनने के बाद ऐसा लगा कि चंपत राय को 'बलि का बकरा' बनाया जा रहा है।"
निष्पक्ष जांच और पारदर्शिता की मांग
दूसरी ओर, संत समाज का एक बड़ा वर्ग इस मामले में पारदर्शिता और जवाबदेही की मांग कर रहा है। महामंडलेश्वर विष्णु दास जी महाराज ने एक अलग दृष्टिकोण रखते हुए कहा, "कई रामभक्तों के मन में शंकाएं थीं और वे चाहते थे कि चंपत राय और अनिल मिश्रा अपने पद छोड़ें। अब दोनों के इस्तीफे के बाद अनेक श्रद्धालु संतुष्ट हैं।" हालांकि, उन्होंने जोर देकर कहा, "किसी व्यक्ति पर एक बार आरोप लग जाने के बाद उसकी छवि पर प्रभाव पड़ता है, इसलिए पूरे मामले की निष्पक्ष जांच बेहद जरूरी है।"
रामलला विराजमान मामले के पूर्व वादी और हनुमानगढ़ी मंदिर के महंत धर्म दास ने भी जांच की वकालत की। उन्होंने कहा, "इस मामले को पक्ष और विपक्ष के नजरिए से नहीं देखा जाना चाहिए, बल्कि सच्चाई सामने आनी चाहिए। यदि किसी प्रकार की अनियमितता या चोरी के आरोप लगे हैं तो उनकी निष्पक्ष जांच होनी चाहिए।"
ट्रस्ट के फैसले का स्वागत
इस पूरे प्रकरण पर कुछ संतों ने ट्रस्ट के फैसले को अंतिम माना है। तपस्वी छावनी के पीठाधीश्वर जगद्गुरु परमहंस आचार्य ने ट्रस्ट के निर्णय का समर्थन करते हुए कहा, "ट्रस्ट ने जो भी फैसला लिया है, वह स्वीकार्य है। भविष्य में भी ट्रस्ट जो निर्णय करेगा, संत समाज उसके साथ खड़ा रहेगा और मंदिर व्यवस्था को लेकर सामूहिक सहयोग जारी रहेगा।"
इनपुट: IANS



