विपक्षी हंगामे के बीच राज्यसभा से 'वंदे मातरम्' के अपमान को दंडनीय बनाने वाला विधेयक पारित
बुधवार को राज्यसभा में विपक्ष के भारी हंगामे और बहिर्गमन (वॉकआउट) के बीच राष्ट्र-गौरव अपमान निवारण (संशोधन) विधेयक, 2026 पारित कर दिया गया। इस संशोधन का मुख्य उद्देश्य राष्ट्रगीत 'वंदे मातरम्' का…
बुधवार को राज्यसभा में विपक्ष के भारी हंगामे और बहिर्गमन (वॉकआउट) के बीच राष्ट्र-गौरव अपमान निवारण (संशोधन) विधेयक, 2026 पारित कर दिया गया। इस संशोधन का मुख्य उद्देश्य राष्ट्रगीत 'वंदे मातरम्' का जानबूझकर किए जाने वाले अपमान को दंडनीय अपराध बनाना है। समाचार एजेंसी IANS की एक रिपोर्ट के अनुसार, गृह राज्य मंत्री नित्यानंद राय ने विधेयक पर हुई चर्चा का जवाब दिया।
राय ने कहा कि यह संशोधन केवल एक कानूनी बदलाव नहीं, बल्कि "भारत की आत्मा, राष्ट्रीय चेतना, सांस्कृतिक विरासत और स्वतंत्रता संग्राम के आदर्शों के प्रति देश की प्रतिबद्धता का प्रतीक है।" उन्होंने सदन को बताया कि 1971 के मूल अधिनियम में पहले से ही राष्ट्रीय ध्वज, संविधान और राष्ट्रगान के सम्मान की रक्षा का प्रावधान है, और अब इस संशोधन के जरिए राष्ट्रगीत 'वंदे मातरम्' को भी इसमें शामिल किया गया है।
विपक्ष का विरोध और बहिर्गमन
विधेयक पर चर्चा के दौरान कांग्रेस और अन्य विपक्षी दलों ने प्रदर्शनकारी छात्रों के खिलाफ पुलिस बल के प्रयोग का मुद्दा उठाया। उन्होंने इस विषय पर सदन में जमकर नारेबाजी की और बाद में विरोध जताते हुए सदन से वॉकआउट कर दिया।
'वंदे मातरम्' का ऐतिहासिक संदर्भ
गृह राज्य मंत्री ने अपने संबोधन में 'वंदे मातरम्' के ऐतिहासिक महत्व पर प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि इसकी रचना 1875 में बंकिमचंद्र चट्टोपाध्याय ने की थी। राय ने कुछ प्रमुख ऐतिहासिक क्षणों का भी उल्लेख किया:
- 1896: गुरुदेव रवींद्रनाथ ठाकुर ने कांग्रेस अधिवेशन में इसका गायन किया।
- 1905: सरला देवी चौधरानी ने बनारस अधिवेशन में इसका पूर्ण गायन किया।
- 15 अगस्त 1947: पंडित ओंकारनाथ ठाकुर ने सरदार वल्लभभाई पटेल की पहल पर आकाशवाणी से संपूर्ण 'वंदे मातरम्' गाया, जिससे स्वतंत्र भारत के पहले दिन की शुरुआत हुई।
- 24 जनवरी 1950: संविधान सभा में डॉ. राजेंद्र प्रसाद ने स्पष्ट किया था कि 'वंदे मातरम्' को राष्ट्रगान 'जन गण मन' के समान ही सम्मान प्राप्त होगा।
सरकार का कांग्रेस पर निशाना
नित्यानंद राय ने कांग्रेस पर निशाना साधते हुए कहा कि यह समझ से परे है कि पार्टी को 'वंदे मातरम्' से आपत्ति क्यों है। उन्होंने आरोप लगाया कि तुष्टीकरण की राजनीति के कारण कांग्रेस राष्ट्रगीत का विरोध कर रही है। राय ने यह भी दावा किया कि 1937 में कांग्रेस अध्यक्ष बनने के बाद पंडित जवाहरलाल नेहरू ने 'वंदे मातरम्' को केवल दो अंतरों तक सीमित कर दिया था।
मंत्री ने चंद्रशेखर आजाद, रामप्रसाद बिस्मिल, अशफाक उल्ला खां और खुदीराम बोस जैसे स्वतंत्रता सेनानियों का जिक्र करते हुए कहा कि उन्होंने अपने अंतिम क्षणों में 'वंदे मातरम्' का उद्घोष किया था। उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय प्रतीकों का सम्मान राजनीति से ऊपर है और यह विधेयक राष्ट्र की एकता और सम्मान को और मजबूत करेगा। इसके बाद सदन ने विधेयक को पारित कर दिया।
इनपुट: IANS



