माकपा मुख्यालय में पुलिस की एंट्री पर राज्यसभा में हंगामा, सांसद ने गृह मंत्री से मांगा जवाब
दिल्ली स्थित भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी) के राष्ट्रीय मुख्यालय एकेजी भवन में पुलिस के प्रवेश का मामला बुधवार को राज्यसभा में गूंजा। केरल से माकपा सांसद डॉ. जॉन ब्रिटास ने इस घटना को सभी…
दिल्ली स्थित भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी) के राष्ट्रीय मुख्यालय एकेजी भवन में पुलिस के प्रवेश का मामला बुधवार को राज्यसभा में गूंजा। केरल से माकपा सांसद डॉ. जॉन ब्रिटास ने इस घटना को सभी राजनीतिक दलों की स्वतंत्रता से जुड़ा एक गंभीर विषय बताते हुए सरकार से स्पष्टीकरण की मांग की।
समाचार एजेंसी IANS की एक रिपोर्ट के अनुसार, डॉ. ब्रिटास ने सदन को बताया कि मंगलवार को दिल्ली पुलिस की एक टीम एकेजी भवन पहुंची थी। उनका उद्देश्य जेएनयू छात्रसंघ की पूर्व अध्यक्ष और छात्र नेता आइशी घोष को गिरफ्तार करना था। सांसद ने आरोप लगाया कि आइशी का दोष केवल जंतर-मंतर पर हुए एक छात्र आंदोलन में हिस्सा लेना था।
पुलिस की कार्रवाई पर सवाल
घटना के समय खुद मुख्यालय में मौजूद होने का दावा करते हुए सांसद ने पुलिस की कार्रवाई पर कई सवाल उठाए। उन्होंने कहा, "पुलिस का इस तरह एक राजनीतिक दल के मुख्यालय में घुसना संसदीय लोकतंत्र और राजनीतिक दलों की स्वतंत्रता से जुड़ा गंभीर मामला है।" डॉ. ब्रिटास ने बताया कि जब उन्होंने पुलिस अधिकारियों से पूछा कि वे "एक राष्ट्रीय राजनीतिक दल के कार्यालय में किस अधिकार से दाखिल हुए हैं", तो उन्हें बताया गया कि आइशी घोष के खिलाफ एक मामला लंबित है।
पूछताछ करने पर यह जानकारी सामने आई कि यह मामला वर्ष 2021 में जेएनयू परिसर में हुए एक प्रदर्शन से संबंधित था। सांसद ने इस बात पर भी आपत्ति जताई कि पुलिसकर्मी बिना वर्दी के आए थे, जो दिल्ली पुलिस की मानक संचालन प्रक्रिया (SOP) का उल्लंघन है। उन्होंने कहा कि गिरफ्तारी करने वाले अधिकारियों की पहचान स्पष्ट होनी चाहिए।
सरकार से स्पष्टीकरण की मांग
डॉ. ब्रिटास ने कहा कि उन्हें कानून के अनुसार की जाने वाली कार्रवाई से कोई आपत्ति नहीं है, लेकिन इस तरह की कार्रवाई से "युवाओं में भय का माहौल बनाने की कोशिश की जा रही है।" उन्होंने सभापति के माध्यम से केंद्रीय गृह मंत्री से इस पूरे घटनाक्रम पर सदन में स्पष्टीकरण देने की मांग की।
उन्होंने अपनी बात समाप्त करते हुए कहा कि "यह केवल एक दल का मुद्दा नहीं बल्कि सभी राजनीतिक दलों और लोकतांत्रिक संस्थाओं से जुड़ा विषय है, इसलिए सरकार को इस मामले पर अपना पक्ष स्पष्ट करना चाहिए।"
इनपुट: IANS



