पेपर लीक पर 'ज़ीरो टॉलरेंस': सरकार ने राज्यसभा में पेश किया लोक परीक्षा संशोधन विधेयक
पेपर लीक जैसी घटनाओं पर पूरी तरह अंकुश लगाने के लक्ष्य के साथ केंद्र सरकार ने लोक परीक्षा (अनुचित साधनों की रोकथाम) संशोधन विधेयक 2026 राज्यसभा में पेश कर दिया है। समाचार एजेंसी IANS के अनुसार…
पेपर लीक जैसी घटनाओं पर पूरी तरह अंकुश लगाने के लक्ष्य के साथ केंद्र सरकार ने लोक परीक्षा (अनुचित साधनों की रोकथाम) संशोधन विधेयक 2026 राज्यसभा में पेश कर दिया है। समाचार एजेंसी IANS के अनुसार, केंद्रीय राज्य मंत्री जितेंद्र सिंह ने गुरुवार को सदन में यह विधेयक विचार और पारित कराने के लिए प्रस्तुत किया। उन्होंने कहा कि यह संशोधन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की 'ज़ीरो टॉलरेंस' नीति के अनुरूप है, जिसका मकसद छात्रों और युवाओं के भविष्य से किसी भी तरह का खिलवाड़ रोकना है।
यह विधेयक 2024 में बने मूल कानून को और अधिक कठोर तथा प्रभावी बनाने के लिए लाया गया है। जितेंद्र सिंह ने सदन को बताया कि यह विधेयक लोकसभा में लगभग दस घंटे की चर्चा के बाद पारित हो चुका है और अब राज्यसभा में विचार के लिए आया है। उन्होंने सभी दलों से रचनात्मक सहयोग की अपील करते हुए कहा कि सरकार किसी भी मुद्दे पर अहम के साथ नहीं चलती और बेहतर सुझावों का हमेशा स्वागत करती है।
कानून में क्या होंगे बड़े बदलाव?
संशोधित विधेयक में सज़ा और जुर्माने के प्रावधानों को काफ़ी सख्त किया गया है। इसके मुख्य बिंदु इस प्रकार हैं:
- व्यक्तिगत सज़ा: पहले के 3 से 5 साल की कैद और 10 लाख रुपये तक के जुर्माने को बढ़ाकर अब 5 से 10 साल की कैद और 50 लाख रुपये तक का जुर्माना किया गया है।
- सेवा प्रदाता पर जुर्माना: परीक्षा आयोजित करने वाली एजेंसियों या कंपनियों के लिए जुर्माना 1 करोड़ रुपये से बढ़ाकर 5 करोड़ रुपये तक कर दिया गया है। साथ ही, परीक्षा कराने पर रोक की अवधि 4 साल से बढ़ाकर 8 साल कर दी गई है।
- वरिष्ठ प्रबंधन की जवाबदेही: कंपनियों के निदेशक और वरिष्ठ प्रबंधन के लिए सज़ा 3-10 साल की कैद से बढ़ाकर 5-10 साल कर दी गई है, और जुर्माना 1 करोड़ से बढ़ाकर 5 करोड़ रुपये तक होगा।
त्वरित न्याय और जांच की व्यवस्था
केंद्रीय मंत्री ने कहा कि सरकार का उद्देश्य सिर्फ मामला दर्ज करना नहीं, बल्कि दोषियों को समय पर सजा दिलाना है। उन्होंने बताया कि संशोधित कानून के तहत जांच दो महीने में और मुकदमा अगले तीन महीने में पूरा करने का लक्ष्य है, ताकि अधिकतम पांच महीने में फैसला आ सके। इसके लिए विशेष फास्ट ट्रैक अदालतों की व्यवस्था भी की गई है। हालिया पेपर लीक मामले का जिक्र करते हुए उन्होंने बताया कि केस CBI को सौंप दिया गया था, आरोपपत्र दाखिल हो चुका है और बुधवार से मुकदमे की सुनवाई भी शुरू हो गई है।
विपक्ष पर निशाना और NTA का इतिहास
जितेंद्र सिंह ने देश में पेपर लीक के पुराने मामलों का भी उल्लेख किया, जिनमें 2009 की रेलवे भर्ती परीक्षा और 2011 की अखिल भारतीय इंजीनियरिंग प्रवेश परीक्षा शामिल हैं। उन्होंने कहा कि यह समस्या किसी एक राज्य या पार्टी तक सीमित नहीं है। उन्होंने राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (NTA) के गठन पर भी बात की। उन्होंने कहा कि इसका सुझाव पहली बार 1992 में कांग्रेस सरकार के समय आया था और 2010 में UPA सरकार ने भी इसकी सिफारिश की थी, लेकिन इसे लागू नहीं किया गया। उन्होंने कहा कि यह काम प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में NDA सरकार ने पूरा किया।
इनपुट: IANS



