‘वंदे मातरम्’ को राष्ट्रगान जैसा सम्मान: राज्यसभा में हंगामे के बीच विधेयक पर विचार का प्रस्ताव पेश
सोमवार को संसद के मानसून सत्र में विपक्षी दलों के हंगामे के बीच राज्यसभा में एक महत्वपूर्ण विधेयक पर विचार करने का प्रस्ताव रखा गया। समाचार एजेंसी IANS के अनुसार, यह विधेयक राष्ट्रीय गीत 'वंदे…
सोमवार को संसद के मानसून सत्र में विपक्षी दलों के हंगामे के बीच राज्यसभा में एक महत्वपूर्ण विधेयक पर विचार करने का प्रस्ताव रखा गया। समाचार एजेंसी IANS के अनुसार, यह विधेयक राष्ट्रीय गीत 'वंदे मातरम्' को राष्ट्रगान 'जन गण मन' के समान कानूनी दर्जा और सुरक्षा प्रदान करने से संबंधित है। केंद्रीय गृह राज्य मंत्री नित्यानंद राय ने राष्ट्र-गौरव अपमान निवारण (संशोधन) विधेयक, 2026 को विचार और पारित करने के लिए सदन के समक्ष प्रस्तुत किया।
यह विधेयक राष्ट्र-गौरव अपमान निवारण अधिनियम, 1971 में संशोधन का प्रस्ताव करता है। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि यदि कोई व्यक्ति राष्ट्रीय गीत 'वंदे मातरम्' का अपमान करता है, तो उसके खिलाफ कानून के तहत कड़ी कार्रवाई की जा सके और उसे दंडित किया जा सके।
सदन में प्रस्ताव और हंगामा
सोमवार को राज्यसभा की कार्यवाही दो बार स्थगित होने के बाद दोपहर 2 बजे जब फिर से शुरू हुई, तो हंगामे के बीच ही गृह राज्य मंत्री ने यह प्रस्ताव पेश किया। नित्यानंद राय ने कहा, "वे प्रस्ताव रखते हैं कि राष्ट्र-गौरव अपमान निवारण अधिनियम, 1971 में संशोधन करने वाले इस विधेयक पर सदन विचार करे।"
हालांकि, प्रस्ताव रखते ही सदन में शोरगुल और तेज हो गया, जिसके कारण इस पर कोई चर्चा नहीं हो सकी। उपसभापति ने कहा कि इस विधेयक पर चर्चा कई दिनों से टल रही है, लेकिन हंगामा जारी रहने के कारण सदन को दोपहर 3 बजे तक के लिए स्थगित करना पड़ा।
विपक्ष का विरोध
कुछ विपक्षी दल इस विधेयक का विरोध कर रहे हैं। भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी) के सदस्य डॉ. जॉन ब्रिटास ने इसका विरोध करते हुए तर्क दिया कि संसद सामान्य कानून के जरिए किसी संवैधानिक घोषणा को दोबारा नहीं लिख सकती। गौरतलब है कि मानसून सत्र के दूसरे सप्ताह में भी दोनों सदनों की कार्यवाही में लगातार व्यवधान बना हुआ है।
इनपुट: IANS



