JNU: यौन उत्पीड़न के आरोपी कांग्रेस सांसद-प्रोफेसर पर कार्रवाई में देरी, ABVP का प्रदर्शन
जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (JNU) परिसर में अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (ABVP) ने एक प्रोफेसर के खिलाफ विरोध प्रदर्शन किया है, जिन पर कई छात्राओं ने यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोप लगाए हैं। समाचार…
जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (JNU) परिसर में अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (ABVP) ने एक प्रोफेसर के खिलाफ विरोध प्रदर्शन किया है, जिन पर कई छात्राओं ने यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोप लगाए हैं। समाचार एजेंसी IANS के अनुसार, आरोपी प्रोफेसर कांग्रेस के सांसद भी हैं, जिसके चलते ABVP ने आरोप लगाया है कि राजनीतिक प्रभाव के कारण उन पर कार्रवाई में देरी की जा रही है।
अपना आक्रोश व्यक्त करते हुए, ABVP कार्यकर्ताओं ने विश्वविद्यालय परिसर में आरोपी प्रोफेसर और JNU की आंतरिक समिति (Internal Committee - IC) का पुतला फूंका। प्रदर्शनकारियों ने विश्वविद्यालय प्रशासन और IC की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि छात्राओं द्वारा शिकायत दर्ज कराए जाने के बावजूद अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई है, जो प्रशासन की संवेदनहीनता को दर्शाता है।
राजनीतिक दबाव और वामपंथी प्रतिनिधियों पर आरोप
ABVP ने इस पूरे मामले में राजनीतिक दबाव की आशंका जताते हुए कहा कि आरोपी के कांग्रेस सांसद होने की वजह से जांच प्रभावित हो रही है। संगठन ने आंतरिक समिति में मौजूद वामपंथी छात्र प्रतिनिधियों की भूमिका पर भी सवाल उठाए हैं। ABVP का आरोप है कि ये प्रतिनिधि, जो महिला अधिकारों की सुरक्षा की बात करते हैं, अपने 'आकाओं' के दबाव में सुनवाई में जानबूझकर देरी कर रहे हैं।
संगठन ने इसे वामपंथी संगठनों का 'असली चरित्र' बताते हुए कहा कि वे केवल महिला अधिकारों की बातें करते हैं, जबकि हकीकत में उनका इतिहास महिलाओं के अधिकारों को दबाने का रहा है।
ABVP पदाधिकारियों के बयान
ABVP की JNU इकाई के अध्यक्ष मयंक पांचाल ने कहा, “JNU में एक प्राध्यापक पर छात्राओं द्वारा लगाए गए गंभीर आरोपों पर एक राजनैतिक संरक्षण के कारण कार्यवाही न होना वामपंथी JNU आईसी और वामपंथी संगठनों का असली चेहरा दिखाता है। यह ही इनका असली चरित्र है।” उन्होंने प्रसन्नाराज से लेकर अकबर चौधरी तक, अपने कैडर पर लगे यौन उत्पीड़न के पुराने मामलों का भी जिक्र किया।
वहीं, ABVP JNU के मंत्री प्रवीण कुमार पीयूष ने कहा, “ये वामपंथी संगठन के कैडर जो जेएनयू आईसी में चुन कर बैठे हैं, वो कुछ भी करने में असमर्थ हैं। उन्हें तुरंत इस्तीफा देना चाहिए।” उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि कुछ दिन पहले आइसा (AISA) के एक कैडर पर लगे यौन उत्पीड़न के मामले की सुनवाई में भी IC के वामपंथी प्रतिनिधि शामिल नहीं हुए थे।
इनपुट: IANS



