राहुल गांधी के लोकसभा भाषण पर NDA सांसदों का तीखा हमला, माफी की मांग तेज़
लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी द्वारा दिए गए एक बयान पर राजनीतिक घमासान शुरू हो गया है। भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) समेत राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) के कई सांसदों ने उनके बयान पर कड़ी…
लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी द्वारा दिए गए एक बयान पर राजनीतिक घमासान शुरू हो गया है। भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) समेत राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) के कई सांसदों ने उनके बयान पर कड़ी आपत्ति जताते हुए इसे तथ्यहीन, भ्रामक और असंसदीय करार दिया है। समाचार एजेंसी IANS की रिपोर्ट के अनुसार, कई नेताओं ने राहुल गांधी से सदन और देश से माफी मांगने की मांग की है।
मुख्य आपत्तियां और आरोप
विवाद का केंद्र राहुल गांधी के भाषण में इस्तेमाल किए गए कुछ शब्द और केंद्रीय गृह मंत्री पर लगाए गए आरोप हैं। भाजपा सांसद जनार्दन सिंह सिग्रीवाल ने कहा कि राहुल के बयान "पूरी तरह झूठे, बेबुनियाद और तथ्यों से परे हैं।" उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि गोली चलाने का आदेश मजिस्ट्रेट द्वारा दिया जाता है, न कि किसी मंत्री द्वारा, और राहुल गांधी को इस प्रक्रिया की जानकारी होनी चाहिए। इसी तरह, टीडीपी सांसद कृष्णा प्रसाद तेनेटी ने भी कहा कि केंद्रीय गृह मंत्री पर गोली चलाने का आदेश देने का आरोप लगाना "तथ्यात्मक रूप से गलत है।"
भाजपा सांसद मयंकभाई नायक ने गृह मंत्री अमित शाह पर की गई टिप्पणियों को "बेहद निंदनीय" बताया। उन्होंने कहा कि विपक्ष के नेता जैसे संवैधानिक पद पर बैठे व्यक्ति को प्रशासनिक और कानूनी प्रक्रियाओं की पूरी जानकारी होनी चाहिए।
'इडियट' शब्द के इस्तेमाल पर विवाद
राहुल गांधी पर छात्रों के लिए कथित तौर पर 'इडियट' शब्द का इस्तेमाल करने का भी आरोप लगा, जिस पर कई सांसदों ने निशाना साधा। पूर्व केंद्रीय मंत्री और भाजपा सांसद अनुराग ठाकुर ने कहा, "यदि राहुल गांधी ने छात्रों के लिए इस शब्द का इस्तेमाल किया है तो उन्हें देश के युवाओं से माफी मांगनी चाहिए।" टीडीपी सांसद कृष्णा प्रसाद तेनेटी ने भी इस शब्द को असंसदीय बताया, जबकि जद(यू) सांसद देवेश चंद्र ठाकुर ने संसद में मर्यादित भाषा के प्रयोग पर जोर दिया।
"चर्चा के बजाय राजनीतिक एजेंडा"
कई सांसदों ने आरोप लगाया कि राहुल गांधी का उद्देश्य विधेयक पर चर्चा करने के बजाय राजनीतिक विवाद खड़ा करना था। भाजपा सांसद नरेश बंसल के अनुसार, "राहुल गांधी ने संबंधित विधेयक पर चर्चा के बजाय अपने राजनीतिक एजेंडे को आगे बढ़ाने का प्रयास किया।" वहीं, भोला सिंह ने कहा कि "राहुल गांधी का उद्देश्य विधेयक पर रचनात्मक चर्चा करना नहीं बल्कि विवाद पैदा करना था।" कमलजीत सहरावत ने भी उन पर गंभीर चर्चा से ध्यान भटकाने का प्रयास करने का आरोप लगाया।
अन्य सांसदों की प्रतिक्रियाएं
इस मुद्दे पर कई अन्य नेताओं ने भी अपनी राय रखी। केंद्रीय राज्य मंत्री एस. पी. सिंह बघेल ने कहा कि विपक्ष के नेता से संयमित भाषा की अपेक्षा की जाती है। भाजपा सांसद मदन राठौड़ ने कहा कि राहुल गांधी पहले भी माफी मांग चुके हैं और उन्हें इस बयान के लिए भी माफी मांगनी चाहिए। वहीं, केंद्रीय राज्य मंत्री सतीश चंद्र दुबे ने कहा कि राहुल गांधी बिना तथ्यों के बयान देते हैं और उनके वक्तव्यों में गंभीरता का अभाव होता है।
इनपुट: IANS



