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‘राफेल’ विमान की डील के कारण भ्रष्टाचार के आरोप में फंसे प्रधानमंत्री नरेंद्रमोदी 

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फ्रांस से हुये ‘राफेल’ विमान सौदे को लेकर भारत में राजनीती शुरू हो गयी है. मोदी सरकार गोपनीयता के समझौते का हवाला देते हुए यह कह रही है कि वह इन विमानों की कीमत नहीं बता सकती. कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर घपले का आरोप लगाते हुए इस सौदे को लेकर हमलावर हो गए हैं.  इस डील पर प्रधानमंत्री की भूमिका पर सवाल उठाये जा रहे हैं.

कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गाँधी का कहना है कि मोदी जी निश्चित रूप से फ्रांस गए विमान को लेकर डील करवाई , पूरा भारत इस बात को जानता हैं. तो मोदी जी विमानों के ऊपर व्यय किये गए धन के बारे में जानकारी क्यों नहीं दे सकते? ऐसा कहते हुये अध्यक्ष राहुल गाँधी ने मोदीजी के ऊपर घोटाले का आरोप लगाया है. साथ ही  राहुल गाँधी ने रक्षा मंत्री निर्मला सीतारमण के बयान पर भी सवाल उठाए. उन्होंने कहा, ‘रक्षा मंत्री कह रही हैं कि वह इस सौदे के बारे में भारत, शहीदों और उनके परिजनों से विमान से जुड़े हुये पैसों को लेकर बातचीत नहीं करेंगी. राहुल गाँधी ने रक्षामंत्री पर सीधा निशाना साधते हुये बोला है इसका मतलब ये घोटाला नहीं तो और क्या है?

दरसल रक्षा मंत्री ने राज्यसभा में लिखित जवाब दिया है कि फ्रांस से हुई राफेल फाइटर प्लेन की डील को जानकारी सार्वजनिक नहीं कर सकती. क्यूंकि डील को लेकर हुई बातचीत राजकीय गोपनीयता है.

क्या दिया फ्रांस ने जवाब

कांग्रेस के द्वारा मोदी सरकार पर राफेल एयरक्राफ्ट सौदे को लेकर आरोप लगाने पर फ्रांस ने भी अपना जवाब दिया है. फ्रांस ने इस डील में किसी भी तरह का घोटाला होने से इंकार किया है. फ्रांस की ओर से कांग्रेस का नाम लिए बिना कहा गया है कि किसी भी तरह का दावा करने से पहले फैक्ट्स चेक जरूर करने चाहिए. विमान के जेट्स की डील विमन के परफॉरमेंस के आधार पर की गयी है.

कैसे हुआ था विमान का सौदा

बता दें कि साल २०१६ में केंद्र सरकार का एक मंत्री स्वयं राफेल सौदे के आकार और प्रति विमान कीमत की जानकारी दे चुका है. उन्होंने बताया है कि , ‘फ्रांस सरकार के साथ 23 सितंबर, 2016 को 36 राफेल विमानों और उनके लिए जरूरी उपकरणों, सेवाओं और हथियारों की खरीद के लिए आईजीए पर दस्तखत किए गए थे. हर राफेल विमान की कीमत करीब 670 करोड़ रुपये की है. सभी विमानों की आपूर्ति अप्रैल 2022 तक हो जाएगी.  इस प्रकार यदि राफेल के साथ हथियारों, उपकरणों आदि के पूरे पैकेज की बात करें तो एक विमान पर लगभग 1,640 करोड़ रुपये की लागत आएगी.

तो वहीं कांग्रेस की ओर से आरोप लगाया गया है कि जहाजों की कीमत 526 करोड़ है, जबकि सौदा 1571 करोड़ का हुआ है.

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