मंगलवार, 8 सितम्बर 2026 · नई दिल्ली
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गणेश चतुर्थी 2024: पर्यावरण के अनुकूल मूर्तियों से प्रयागराज और जामनगर में उत्सव की नई लहर

आगामी गणेश चतुर्थी और हरतालिका तीज के त्योहारों को लेकर पूरे देश में उत्साह है, और इस बार उत्तर प्रदेश के प्रयागराज से लेकर गुजरात के जामनगर तक पर्यावरण संरक्षण का संदेश भी गूंज रहा है। समाचार एजेंसी…

गणेश चतुर्थी 2024: पर्यावरण के अनुकूल मूर्तियों से प्रयागराज और जामनगर में उत्सव की नई लहर
(फोटो: IANS)

आगामी गणेश चतुर्थी और हरतालिका तीज के त्योहारों को लेकर पूरे देश में उत्साह है, और इस बार उत्तर प्रदेश के प्रयागराज से लेकर गुजरात के जामनगर तक पर्यावरण संरक्षण का संदेश भी गूंज रहा है। समाचार एजेंसी IANS की एक रिपोर्ट के अनुसार, दोनों शहरों में कलाकार और स्वयंसेवी समूह पारंपरिक प्लास्टर ऑफ पेरिस की जगह मिट्टी और गाय के गोबर जैसी पर्यावरण-अनुकूल सामग्री से बनी मूर्तियों को बढ़ावा दे रहे हैं।

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इस पहल का मुख्य उद्देश्य त्योहारों के बाद होने वाले जल प्रदूषण को रोकना और लोगों को एक स्थायी विकल्प देना है। इन मूर्तियों को घर पर ही आसानी से विसर्जित किया जा सकता है, और उनकी मिट्टी या खाद को पौधों के लिए इस्तेमाल किया जा सकता है।

प्रयागराज में गाय के गोबर से बनी पवित्र मूर्तियां

प्रयागराज में, महिलाओं का एक समूह गणेश और शिव-पार्वती की मूर्तियां बनाने के लिए गाय के गोबर का उपयोग कर रहा है। मूर्तिकार आभा सिंह ने बताया, "गणेश चतुर्थी और तीज आने वाला है, इसलिए हमने पर्यावरण से जुड़ी कोई चीज करने के बारे में सोचा। ...हमारे ग्रुप की महिलाओं ने तय किया कि इस बार गणेश और लक्ष्मी की मूर्तियों के साथ-साथ हम गाय के गोबर से गौरी-पार्वती की मूर्तियां भी बनाएंगी।" उन्होंने गाय के गोबर की पवित्रता पर जोर देते हुए कहा कि इससे बनी मूर्तियां पूजनीय होती हैं और पानी में आसानी से घुल जाती हैं, जिन्हें साल भर घर में भी रखा जा सकता है।

इसी समूह की रेणु कंचन ने विसर्जन से जुड़ी भावनात्मक पीड़ा का जिक्र करते हुए कहा, "त्योहार के बाद भगवान की मूर्तियों का विसर्जन करते दुख होता है। इसलिए हमने सोचा कि गाय के गोबर से मूर्तियां बनाई जाएं। इन मूर्तियों को हम लोग घर में ही विसर्जित करके और खाद बनाकर गमलों में डाल देते हैं।"

जामनगर में मिट्टी की मूर्तियों की धूम

वहीं गुजरात के जामनगर में, मिट्टी से बनी इको-फ्रेंडली गणेश मूर्तियों की मांग चरम पर है। मूर्तिकार अतुल प्रजापति और उनका परिवार पिछले 20 सालों से यह काम कर रहा है। उन्होंने बताया कि इस साल उन्होंने 276 अलग-अलग स्वरूपों में 5,500 से ज़्यादा मूर्तियां तैयार की हैं, जिनमें लालबाग के राजा और सिद्धि विनायक जैसे प्रसिद्ध रूप भी शामिल हैं। उन्होंने कहा, "मूर्तियों में तीन प्रकार की मिट्टियों का उपयोग करते हैं। ...मूर्तियों को रंगने में ऐसा रंग उपयोग करते हैं, जो पर्यावरण को नुकसान नहीं पहुंचाता।"

जामनगर में एक विशेष आकर्षण हलारी पगड़ी पहने गणेश की मूर्तियां हैं, जिनकी लगभग 85% बुकिंग पहले ही हो चुकी है। एक ग्राहक राज सिसगिया ने अपनी खुशी जाहिर करते हुए कहा, "मैं हलारी पगड़ी में भगवान गणेश की मूर्ति देखने आया था। मुझे मूर्तियां पसंद आईं तो मैंने दो एक बड़ी और एक छोटी मूर्ति खरीद ली है।"

इनपुट: IANS

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News4Social धर्म-संस्कृति डेस्क

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