ब्रिक्स शिखर सम्मेलन: प्रधानमंत्री मोदी और राष्ट्रपति जिनपिंग के बीच द्विपक्षीय वार्ता, संबंधों को मज़बूत करने पर ज़ोर
भारत की मेज़बानी में हो रहे 18वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग के बीच एक अहम द्विपक्षीय वार्ता हुई। समाचार एजेंसी IANS के अनुसार, लगभग सा…
भारत की मेज़बानी में हो रहे 18वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग के बीच एक अहम द्विपक्षीय वार्ता हुई। समाचार एजेंसी IANS के अनुसार, लगभग सात साल बाद भारत आए चीनी राष्ट्रपति के साथ इस उच्चस्तरीय बैठक में दोनों नेताओं ने आपसी संबंधों को और प्रगाढ़ करने पर ज़ोर दिया।
बैठक में प्रधानमंत्री मोदी के साथ विदेश मंत्री एस जयशंकर और राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (NSA) अजित डोभाल भी शामिल थे। प्रधानमंत्री मोदी ने राष्ट्रपति जिनपिंग का स्वागत करते हुए कहा, "उन्हें बहुत खुशी हो रही है, उनका स्वागत करते हुए।" उन्होंने ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में सकारात्मक वक्तव्य के लिए चीनी राष्ट्रपति का आभार भी जताया। पीएम मोदी ने आगे कहा, "हमें द्विपक्षीय सहयोग पर बात करने का एक बार फिर मौका मिल रहा है।"
आतंकवाद और पश्चिम एशिया पर साझा रुख
इस शिखर सम्मेलन में सदस्य देशों द्वारा जारी किया गया साझा बयान भारत के लिए एक बड़ी उपलब्धि माना जा रहा है। बयान में जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुए आतंकी हमले की कड़ी निंदा की गई। इसमें कहा गया, "हम 22 अप्रैल 2025 को जम्मू-कश्मीर में हुए आतंकवादी हमले की कड़े शब्दों में निंदा करते हैं, जिसमें 26 लोग मारे गए और कई घायल हो गए।"
बयान में आतंकवाद के सभी रूपों से लड़ने की प्रतिबद्धता दोहराई गई, जिसमें आतंकवादियों की सीमा पार आवाजाही, टेरर फंडिंग और सुरक्षित पनाहगाहों को रोकना शामिल है। सदस्यों ने ज़ोर देकर कहा कि आतंकवाद को किसी धर्म, राष्ट्रीयता या सभ्यता से नहीं जोड़ा जाना चाहिए और इसमें शामिल सभी लोगों को न्याय के कटघरे में लाया जाना चाहिए।
शांति बहाली में चीन की भूमिका
वहीं, पश्चिम एशिया संकट पर भी चीन ने अपनी भूमिका स्पष्ट की। सिन्हुआ न्यूज एजेंसी के मुताबिक, राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने कहा कि चीन मध्य पूर्व और खाड़ी क्षेत्र में शांति व स्थिरता लाने में अपनी उचित भूमिका निभाना चाहता है। उन्होंने कहा कि चीन इसके लिए ब्रिक्स के अन्य सदस्य देशों के साथ मिलकर काम करने को तैयार है। उन्होंने यह भी माना कि इस युद्ध से क्षेत्र के लोगों को भारी नुकसान हुआ है, जो अंतरराष्ट्रीय समुदाय के हितों के खिलाफ है। गौरतलब है कि गलवान घाटी में हुई झड़प के बाद राष्ट्रपति जिनपिंग का यह पहला भारत दौरा है।
इनपुट: IANS



