गुरूवार, 3 सितम्बर 2026 · नई दिल्ली
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पोलावरम परियोजना पर विवाद: जगन मोहन रेड्डी ने चंद्रबाबू नायडू सरकार पर प्रचार और कुप्रबंधन का आरोप लगाया

आंध्र प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री वाई.एस. जगन मोहन रेड्डी ने मुख्यमंत्री एन. चंद्रबाबू नायडू पर पोलावरम परियोजना को लेकर गंभीर आरोप लगाए हैं। उन्होंने दावा किया है कि नायडू सरकार पहले से मौजूद पंपों…

पोलावरम परियोजना पर विवाद: जगन मोहन रेड्डी ने चंद्रबाबू नायडू सरकार पर प्रचार और कुप्रबंधन का आरोप लगाया
(फोटो: IANS)

आंध्र प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री वाई.एस. जगन मोहन रेड्डी ने मुख्यमंत्री एन. चंद्रबाबू नायडू पर पोलावरम परियोजना को लेकर गंभीर आरोप लगाए हैं। उन्होंने दावा किया है कि नायडू सरकार पहले से मौजूद पंपों से गोदावरी का पानी पोलावरम नहर में छोड़कर इसे अपनी उपलब्धि बताकर प्रचार कर रही है। समाचार एजेंसी IANS के अनुसार, जगन ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर एक विस्तृत बयान जारी कर सरकार की मंशा पर सवाल उठाए।

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जगन ने स्पष्ट किया कि पुरुषोत्तमपट्टनम परियोजना से लगभग 3,500 क्यूसेक पानी पंप किया जा रहा है, लेकिन यह व्यवस्था और पंप पहले से ही मौजूद थे। उन्होंने सवाल किया, "यदि पानी पोलावरम जलाशय से गुरुत्वाकर्षण के जरिए नहीं आ रहा है, तो सरकार इसे पोलावरम का पानी बताकर प्रचार क्यों कर रही है?"

पिछली सरकारों का योगदान और मौजूदा स्थिति

वाईएसआरसीपी अध्यक्ष ने कहा कि पोलावरम लेफ्ट मेन कैनाल का लगभग 79 प्रतिशत काम उनके पिता और पूर्व मुख्यमंत्री वाई.एस. राजशेखर रेड्डी के कार्यकाल में ही पूरा हो गया था। उन्होंने आरोप लगाया कि मौजूदा सरकार केवल पुराने ढांचे का इस्तेमाल कर झूठा श्रेय ले रही है।

जगन ने 2014-19 के दौरान चंद्रबाबू नायडू के कार्यकाल में परियोजना के क्रियान्वयन पर भी निशाना साधा। उन्होंने दावा किया कि उस दौरान कथित गलत योजना, कुप्रबंधन और भ्रष्टाचार के कारण राज्य को भारी नुकसान हुआ। उनके अनुसार, टीडीपी सरकार ने स्पिलवे और कॉफ़रडैम का काम पूरा किए बिना डायफ्राम वॉल का निर्माण शुरू कर दिया, जिससे बाढ़ के दौरान मुख्य बांध की नींव को नुकसान पहुंचा।

परियोजना की क्षमता और पुनर्वास पर सवाल

पूर्व मुख्यमंत्री ने परियोजना के भविष्य को लेकर भी चिंता जताई। उन्होंने कहा कि पोलावरम का निर्धारित फुल रिजर्वायर लेवल (FRL) 45.72 मीटर है, जबकि इसे 41.15 मीटर तक सीमित करने की बातें सामने आ रही हैं। उन्होंने सरकार से इस पर स्थिति स्पष्ट करने और विस्थापित परिवारों के पुनर्वास पैकेज के भुगतान का मुद्दा भी उठाया। जगन के मुताबिक, जब तक परियोजना अपनी पूरी क्षमता तक नहीं बनती, तब तक इसके वास्तविक लाभ नहीं मिल पाएंगे।

उत्तरांध्र सुजला श्रवंती परियोजना की अनदेखी

जगन मोहन रेड्डी ने उत्तरांध्र सुजला श्रवंती परियोजना का मुद्दा उठाते हुए कहा कि उनकी सरकार ने 2022 में इसकी अनुमानित लागत को संशोधित कर 17,050.20 करोड़ रुपये की प्रशासनिक मंजूरी दी थी। उन्होंने दावा किया कि उनके कार्यकाल में पैकेज-1 और 2 के काम टेंडर चरण तक पहुंच गए थे, लेकिन नायडू सरकार इस पर ध्यान नहीं दे रही है।

अंत में, जगन ने चंद्रबाबू नायडू से 'ड्रामा' बंद कर परियोजना को उसकी निर्धारित 45.72 मीटर की ऊंचाई तक पूरा करने पर ध्यान केंद्रित करने की अपील की, ताकि गुरुत्वाकर्षण के जरिए नहरों में पानी की आपूर्ति सुनिश्चित हो सके।

इनपुट: IANS

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News4Social नेशनल डेस्क

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