यूपी में सौर ऊर्जा की क्रांति: 'पीएम सूर्य घर योजना' के तहत रूफटॉप सोलर लगाने में प्रदेश देश में दूसरे स्थान पर
प्रधानमंत्री की महत्वाकांक्षी 'सूर्य घर: मुफ्त बिजली योजना' के क्रियान्वयन में उत्तर प्रदेश ने एक बड़ी उपलब्धि हासिल की है। घरेलू छतों पर सोलर संयंत्र स्थापित करने के मामले में यह राज्य अब पूरे देश…
प्रधानमंत्री की महत्वाकांक्षी 'सूर्य घर: मुफ्त बिजली योजना' के क्रियान्वयन में उत्तर प्रदेश ने एक बड़ी उपलब्धि हासिल की है। घरेलू छतों पर सोलर संयंत्र स्थापित करने के मामले में यह राज्य अब पूरे देश में दूसरे स्थान पर आ गया है। समाचार एजेंसी IANS के अनुसार, मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में प्रभावी कार्यान्वयन, विभागीय समन्वय और नियमित निगरानी के चलते यह संभव हो पाया है।
प्रदेश सरकार द्वारा जारी आंकड़ों के मुताबिक, उत्तर प्रदेश में अब तक कुल 6,74,393 घरेलू रूफटॉप सोलर संयंत्र लगाए जा चुके हैं। इस राष्ट्रीय रैंकिंग में गुजरात 7,49,839 संयंत्रों के साथ पहले पायदान पर है, जबकि महाराष्ट्र 6,73,717 संयंत्रों के साथ उत्तर प्रदेश के ठीक बाद तीसरे स्थान पर काबिज है।
ऊर्जा उत्पादन और आर्थिक लाभ
यूपी नेडा के निदेशक रविंदर सिंह ने बताया कि इन संयंत्रों के माध्यम से राज्य में 2,283.8 मेगावाट (या 2.28 गीगावाट) की सौर ऊर्जा क्षमता विकसित हुई है। इस पहल से न केवल लाखों परिवार अपनी छतों पर स्वच्छ ऊर्जा पैदा कर रहे हैं, बल्कि उनकी पारंपरिक बिजली पर निर्भरता भी घटी है, जिससे बिजली के बिलों में कमी आई है। उन्होंने दावा किया कि प्रदेश के परिवारों को हर दिन लगभग 6.5 करोड़ रुपये मूल्य की सौर बिजली का सीधा लाभ मिल रहा है।
रोजगार और उद्योग को बढ़ावा
इस योजना का सकारात्मक प्रभाव सिर्फ ऊर्जा क्षेत्र तक सीमित नहीं है, बल्कि इसने रोजगार के बड़े अवसर भी पैदा किए हैं। रविंदर सिंह के अनुसार, योजना के विस्तार से प्रदेश में सौर ऊर्जा से जुड़ी 7,000 से अधिक कंपनियां और व्यावसायिक इकाइयां सक्रिय हुई हैं। इन इकाइयों के माध्यम से 85,000 से ज्यादा लोगों को प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से रोजगार मिला है। सोलर पैनल की स्थापना, डिजाइनिंग, नेट मीटरिंग, लॉजिस्टिक्स और रखरखाव जैसे क्षेत्रों में रोजगार के नए रास्ते खुले हैं। साथ ही, सोलर मॉड्यूल, इन्वर्टर और अन्य उपकरणों के निर्माण से जुड़े उद्योगों को भी काफी बढ़ावा मिला है।
पर्यावरण संरक्षण और भूमि की बचत
रूफटॉप सोलर मॉडल का एक बड़ा पर्यावरणीय लाभ भी है। सरकार का दावा है कि प्रदेश में स्थापित 2.28 गीगावाट की क्षमता से हर साल लगभग 3.8 अरब यूनिट स्वच्छ बिजली का उत्पादन होगा। इससे प्रति वर्ष करीब 27 लाख टन कार्बन डाइऑक्साइड उत्सर्जन में कमी आने का अनुमान है, जो लगभग 12 करोड़ वयस्क पेड़ों द्वारा एक साल में सोखे गए कार्बन के बराबर है। इसके अलावा, चूंकि ये संयंत्र छतों पर लगते हैं, इसलिए बिजली उत्पादन के लिए अलग से जमीन की जरूरत नहीं पड़ती। एक अनुमान के मुताबिक, इससे 9,000 एकड़ से अधिक भूमि की बचत हुई है, जिसका उपयोग अन्य विकास कार्यों के लिए किया जा सकता है।
इनपुट: IANS



