सोमवार, 20 जुलाई 2026 · नई दिल्ली
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गुजरात: सौर ऊर्जा से सिंचित हो रहे खेत, पीएम कुसुम योजना से किसानों की आय में बढ़ोतरी

गुजरात के दूरदराज और आदिवासी इलाकों में खेती-किसानी की तस्वीर बदल रही है। केंद्र सरकार की प्रधानमंत्री किसान ऊर्जा सुरक्षा एवं उत्थान महाभियान (पीएम कुसुम) योजना की बदौलत किसान अब सिंचाई के लिए केवल…

गुजरात: सौर ऊर्जा से सिंचित हो रहे खेत, पीएम कुसुम योजना से किसानों की आय में बढ़ोतरी
(फोटो: IANS)

गुजरात के दूरदराज और आदिवासी इलाकों में खेती-किसानी की तस्वीर बदल रही है। केंद्र सरकार की प्रधानमंत्री किसान ऊर्जा सुरक्षा एवं उत्थान महाभियान (पीएम कुसुम) योजना की बदौलत किसान अब सिंचाई के लिए केवल मानसून पर निर्भर नहीं हैं। सौर ऊर्जा से चलने वाले पंपों ने पानी की कमी को दूर कर दिया है, जिससे किसान साल भर फसलें उगा पा रहे हैं और उनकी आमदनी में भी इज़ाफ़ा हो रहा है।

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समाचार एजेंसी IANS की एक रिपोर्ट के अनुसार, इस योजना के तहत गुजरात सरकार किसानों को अतिरिक्त सब्सिडी भी मुहैया करा रही है। मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल के नेतृत्व में आदिवासी और वन क्षेत्रों के किसानों को केंद्र की 30 प्रतिशत सब्सिडी के अलावा राज्य सरकार 70 प्रतिशत अतिरिक्त सब्सिडी दे रही है। इस पहल से न केवल किसानों की बिजली और डीज़ल पर होने वाले खर्च की चिंता खत्म हुई है, बल्कि उनका जीवन भी आसान हुआ है।

साल में तीन फसलें, चिंता मुक्त किसान

इस योजना के लाभार्थियों में तापी जिले के गवान गांव के किसान गवजीभाई वसावा भी शामिल हैं। उनके बेटे राजेशभाई वसावा बताते हैं कि सोलर पंप लगने के बाद वे साल में तीन फसलें उगा रहे हैं। उन्होंने कहा, "खेत में सोलर पंप लगाने से हमें ज्यादा पानी मिलता है। अब बिजली और डीजल के खर्च की कोई चिंता नहीं है और न ही सिंचाई के लिए रात में जागना पड़ता है।"

इसी तरह, आदिवासी बहुल डांग जिले के उमरपाड़ा गांव के किसान भरतभाई वाघमारे भी इस योजना का लाभ उठाकर धान, तुअर, उड़द के साथ-साथ बैंगन और चौली जैसी सब्जियां भी उगा रहे हैं। उन्होंने कहा, "हमें पीएम कुसुम योजना का लाभ मिला है। यह सहायता सरकार ने दी है।"

योजना का विस्तार और प्रभाव

गुजरात के ऊर्जा और पेट्रोकेमिकल्स मंत्री ऋषिकेश पटेल के मुताबिक, यह योजना किसानों को सूरज की रोशनी से बिजली बनाकर अपनी आय बढ़ाने का मौका दे रही है। राज्य में पीएम कुसुम योजना के एक घटक के तहत 695 मेगावाट क्षमता वाले 256 सोलर पावर प्लांट शुरू किए गए हैं, जिनसे लगभग 2.97 लाख पंपों का सौरीकरण हुआ है। इसके अतिरिक्त, अब तक 22,787 सोलर पंप भी शुरू किए जा चुके हैं। यह तकनीक अब आदिवासी इलाकों में बेहतर फसल, अधिक आय और खुशहाल जीवन का प्रतीक बन गई है।

इनपुट: IANS

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News4Social गुजरात डेस्क

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