PM आवास के बाहर विपक्षी सांसदों का प्रदर्शन: सैकड़ों वकीलों ने CJI को पत्र लिखकर सुप्रीम कोर्ट से हस्तक्षेप की मांग की
प्रधानमंत्री के आधिकारिक आवास के बाहर विपक्षी सांसदों द्वारा किए गए एक विरोध प्रदर्शन का मामला अब सुप्रीम कोर्ट तक पहुंच गया है। देशभर के सैकड़ों वकीलों ने भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) को एक संयुक्…
प्रधानमंत्री के आधिकारिक आवास के बाहर विपक्षी सांसदों द्वारा किए गए एक विरोध प्रदर्शन का मामला अब सुप्रीम कोर्ट तक पहुंच गया है। देशभर के सैकड़ों वकीलों ने भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) को एक संयुक्त प्रतिवेदन भेजकर इस मामले में न्यायिक हस्तक्षेप की मांग की है। समाचार एजेंसी IANS की रिपोर्ट के मुताबिक, वकीलों ने उच्च सुरक्षा वाले क्षेत्रों में बिना इजाजत होने वाले प्रदर्शनों को लेकर अदालत से व्यापक दिशा-निर्देश जारी करने का भी आग्रह किया है।
यह पूरा मामला 21 जुलाई की एक घटना से जुड़ा है, जब जंतर-मंतर पर 'कॉकरोच जनता पार्टी' (सीजेपी) के संसद मार्च में शामिल छात्रों पर दिल्ली पुलिस ने लाठीचार्ज किया था। इसी कार्रवाई के विरोध में अगले दिन कई विपक्षी सांसद प्रधानमंत्री आवास के पास धरने पर बैठ गए थे। प्रदर्शनकारियों का नेतृत्व लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी कर रहे थे और उनके साथ कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे समेत कई अन्य नेता शामिल थे। प्रदर्शन के दौरान उन्होंने प्रधानमंत्री और केंद्रीय गृह मंत्री के इस्तीफे की मांग की थी।
सुरक्षा और कानून-व्यवस्था पर सवाल
वकीलों ने अपने पत्र में आरोप लगाया है कि राहुल गांधी, मल्लिकार्जुन खड़गे, प्रियंका गांधी वाड्रा और समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव समेत कई सांसद बिना किसी पूर्व अनुमति के प्रधानमंत्री आवास के बाहर इकट्ठा हुए थे। उनका तर्क है कि पीएम आवास राष्ट्रीय सुरक्षा की दृष्टि से एक अत्यंत संवेदनशील और उच्च सुरक्षा वाला क्षेत्र है। पत्र में कहा गया है कि इस तरह का प्रदर्शन सुरक्षा व्यवस्था, सार्वजनिक व्यवस्था और कानून के शासन को लेकर गंभीर सवाल खड़े करता है।
प्रतिवेदन में इस बात पर जोर दिया गया है कि शांतिपूर्ण विरोध हर नागरिक का संवैधानिक अधिकार है, लेकिन इसका इस्तेमाल संविधान और कानून की सीमाओं के भीतर ही किया जाना चाहिए, खासकर उन जगहों पर जहां राष्ट्रीय सुरक्षा दांव पर हो।
सुप्रीम कोर्ट से की गई अपील
इस घटनाक्रम के दौरान मौके पर भारी पुलिस बल तैनात किया गया था और केंद्रीय राज्यमंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने प्रदर्शन स्थल पर पहुंचकर राहुल गांधी से मुलाकात की थी और प्रदर्शन खत्म करने की अपील की थी। अब वकीलों ने सुप्रीम कोर्ट से अनुरोध किया है कि वह इस पूरी घटना का परीक्षण करे और यह तय करे कि क्या इसमें न्यायिक हस्तक्षेप की आवश्यकता है। साथ ही, उन्होंने भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए उच्च सुरक्षा वाले संरक्षित क्षेत्रों में किसी भी अनधिकृत प्रदर्शन या भीड़ को रोकने के लिए स्पष्ट दिशानिर्देश जारी करने पर विचार करने का भी आग्रह किया है।
इनपुट: IANS



