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Photos: आसमान में बिखरी नीली-हरी-लाल रोशनी… US-कनाडा में आखिर क्यों नजर आती हैं ये Northern Lights?

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Photos: आसमान में बिखरी नीली-हरी-लाल रोशनी… US-कनाडा में आखिर क्यों नजर आती हैं ये Northern Lights?


Photos: आसमान में बिखरी नीली-हरी-लाल रोशनी… US-कनाडा में आखिर क्यों नजर आती हैं ये Northern Lights?

कनाडा और अमेरिका के कई हिस्सों में इन दिनों रात का आसमान किसी रंगीन पेंटिंग जैसा दिख रहा है.नीली, हरी, गुलाबी, लाल रोशनी की लहरें पूरी रात आसमान में नाचती नज़र आ रही है, जो प्रकृति का सबसे खूबसूरत करिश्मा है. इसे नॉर्दर्न लाइट्स (Northern Lights) या Aurora Borealis (औरोरा बोरेलिस) कहा जाता है.

अमेरिकी मौसम एजेंसी NOAA के अनुसार, यह अद्भुत नज़ारा कनाडा और उत्तरी अमेरिका के कई इलाकों में देखने को मिल रहा है. यह दृश्य कनाडा के ब्रिटिश कोलंबिया, अल्बर्टा, सस्कैचेवान, मैनिटोबा, युकोन, नॉर्थवेस्ट टेरिटरीज़, ननावुत, लैब्राडोर और ओंटारियो व क्यूबेक के उत्तरी हिस्सों तक देखा जा रहा है. स्पेस वेदर प्रेडिक्शन सेंटर के विशेषज्ञ शॉन डाहल के मुताबिक़, “इसकी सबसे ज्यादा चमक शाम 7 से 10 बजे (Eastern Time) के बीच नज़र आ रही है.

वजह: सूरज का गुस्सा

हाल के दिनों में सूरज ने कई बार अपनी “गरमी” दिखाते हुए शक्तिशाली विस्फोट (Solar Flares) किए हैं. इन विस्फोटों से निकलने वाले Coronal Mass Ejections (CME) यानी चार्ज्ड पार्टिकल्स के तूफान तेज़ी से अंतरिक्ष में फैल गए और धरती के चुंबकीय क्षेत्र (magnetic field) से टकरा गए.

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जब ये तेज़ कण (protons और electrons) हमारे वायुमंडल की गैसों से टकराते हैं तो ऊर्जा निकलती है और आसमान में ये चमकदार रोशनी बनती है.

  • हरा रंग: ऑक्सीजन से टकराने पर
  • लाल रंग: ऊंचाई पर मौजूद ऑक्सीजन से
  • नीला और बैंगनी: नाइट्रोजन से टकराने पर

कनाडाई खगोल वैज्ञानिक डॉ. जेसी रोज़रसन बताते हैं, “सूरज से निकले ये तूफ़ान धरती की मैग्नेटिक परत में फंस जाते हैं और वायुमंडल से टकराकर आसमान को रंगों से भर देते हैं.”

कहां-कहां दिखती हैं?

धरती के चारों ओर एक चुंबकीय ढाल (magnetic field) फैली है, जो हमें सूरज से आने वाले हानिकारक कणों से बचाती है. यह चुंबकीय ढाल सबसे ज़्यादा ध्रुवों (poles) यानी उत्तरी और दक्षिणी सिरों पर खुली होती है इसीलिए जब सूर्य से आने वाले चार्ज्ड पार्टिकल्स पृथ्वी से टकराते हैं, तो वे सीधे इन ध्रुवों की दिशा में खिंच जाते हैं. वहां जाकर ये वायुमंडल से टकराते हैं और रंगीन रोशनी पैदा करते हैं.

  • उत्तरी गोलार्ध में ये लाइट्स कनाडा, अलास्का, नॉर्वे, स्वीडन, फिनलैंड और रूस जैसे देशों में दिखती हैं.
  • वहीं दक्षिणी गोलार्ध में ये अंटार्कटिका और ऑस्ट्रेलिया के दक्षिणी इलाकों में देखी जाती है.

दक्षिण तक पहुंचीं रोशनियां

इस बार नॉर्दर्न लाइट्स सिर्फ़ कनाडा तक सीमित नहीं रहीं बल्कि अमेरिका के टेक्सास और न्यू मेक्सिको जैसे दक्षिणी राज्यों में भी इन्हें देखा गया. स्पेस वेदर सेंटर का कहना है कि यह Geomagnetic Storm भारतीय समयनुसार गुरुवार सुबह से शुक्रवार रात तक जारी रह सकता है, हालांकि तीव्रता थोड़ी कम हो जाएगी.

सूरज के “11 साल के चक्र” का असर

NASA के मुताबिक़, सूरज इस समय अपने 11-वर्षीय सौर चक्र के ‘Solar Maximum’ दौर में है. इस फेज़ में सूर्य की चुंबकीय गतिविधि तेज़ होती हैं और इसी वजह से धरती पर रंग-बिरंगी रोशनी जैसे दृश्य बार-बार दिखते हैं.

हर 11 साल में सूरज के ध्रुव (magnetic poles) एक-दूसरे की जगह बदलते हैं. इस दौरान उसके चुंबकीय क्षेत्र में “twists और tangles” पैदा होते हैं, जो सौर तूफ़ानों और नॉर्दर्न लाइट्स की घटनाओं को बढ़ाते हैं.

सौर तूफ़ान का खतरनाक रूप

इन खूबसूरत लाइट्स के पीछे छिपी ताक़त कई बार नुकसान भी पहुंचाती है. इतिहास में कई बार सौर तूफ़ानों ने धरती की तकनीक को हिला दिया है:

  • 1859: एक भीषण सौर तूफ़ान ने हवाई तक ऑरोरा फैला दी और टेलीग्राफ लाइनों में आग लगा दी.
  • 1972: सौर तूफ़ान ने वियतनाम तट पर अमेरिकी समुद्री माइंस (sea mines) को ब्लास्ट कर दिया.
  • 1989: क्यूबेक, कनाडा में एक सौर तूफ़ान से पूरे प्रांत की बिजली गुल हो गई थी.

NASA और NOAA के विशेषज्ञ कहते हैं कि सौर तूफ़ानों की भविष्यवाणी महीनों पहले करना लगभग असंभव है लेकिन जैसे ही सूरज से कोई CME निकलता है और धरती की दिशा में बढ़ता है, तब कुछ दिन पहले ही चेतावनी जारी कर दी जाती है.

कैसे देखें यह अद्भुत नज़ारा

ये नजारा इन दिनों कनाडा या अमेरिका के उत्तरी हिस्से में नजर आ रहा है. इसे देखने के लिए शहर की लाइट्स से दूर किसी पार्क या झील का किनारे जाना पड़ता है. जहां आसमान साफ़ और चांद की रोशनी कम हो. आंखों से रंग अक्सर फीके नजर आते हैं. हालांकि तो स्मार्टफोन कैमरे से लम्बे एक्सपोज़र में रंग ज़्यादा चमकदार दिखते हैं. NOAA की वेबसाइट और Aurora Forecast ऐप्स इनकी रीयल-टाइम लोकेशन बताती हैं.

आगे भी दिखेंगे और नज़ारे

वैज्ञानिकों का कहना है कि सूर्य की सक्रियता 2025 तक बढ़ी रहेगी यानी आने वाले महीनों में ऐसे नज़ारे और ज़्यादा देखने को मिल सकते हैं.

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