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वफादारी: मालकिन की जान बचाने के लिए तेंदुए पर झपटा कुत्ता और फिर हुआ ये...

कहते हैं कि कुत्तों से वफादार कोई नहीं होता है। इस कहावत को 21वीं की सदी में साकार करके अपनी वफादारी मिसाल पेश की है, एक कुत्ते ने।

वफादारी: मालकिन की जान बचाने के लिए तेंदुए पर झपटा कुत्ता और फिर हुआ ये...

कहते हैं कि कुत्तों से वफादार कोई नहीं होता है। इस कहावत को 21वीं की सदी में साकार करके अपनी वफादारी मिसाल पेश की है, एक कुत्ते ने। वैसे तो पालतू कुत्तों के वफादारी के किस्से आपने पढ़े और सुनें होंगे, लेकिन यहां अपनी जान पर खेलकर इस कुत्ते अपनी मालकिन को तेंदुए का शिकार होने से बचाया।

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दरअसल, पश्चिम बंगाल के दार्जिलिंग से एक मामला सामने आया है। जहां टाइगर नाम का कुत्ता अपनी 58 साल की मालकिन की जान बचाने के लिए बुधवार को तेंदुए से भिड़ गया। इस जांबाज कुत्ते की उम्र महज चार साल है। इस कुत्ते की मालकिन अरुणा लामा उस हादसे को कभी नहीं भूल सकती हैं ।

पूरा वाक्या की शुरूआत उस वक्त हुई जब अरूणा लाला नाम की महिला ने अपने स्टोररुम का दरवाजा खोला और उन्हें एक आवाज सुनाई दी। अंधेरे में उन्हें लाल आंखे दिखाई दीं। डर के मारे अरुणा ने दरवाजा बंद करने की कोशिश की लेकिन तब तक तेंदुए ने उनपर हमला कर दिया था। 

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वहीं, अरुणा की बेटी स्मृति लामा ने कहा, 'मैं और मेरी मां नया गांव स्थित अपने घर में चाय पी रहे थे। तभी हमने रसोई घर के नीचे स्टोररूम से कुछ शोर सुना। चूंकि हमने वहां जिंदा मुर्गों को रखा हुआ था। इसलिए उन्होंने वहां जाकर चेक करने का फैसला लिया। जब उन्होंने दरवाजा खोला वह कुछ सेकेंड के लिए चौंक गई और फिर चिल्लाने लगी। इसी समय किसी ने उनपर हमला किया।'

अरुणा ने खुद को तेंदुए के चंगुल से बचाने की कोशिश की, लेकिन वह छूट नहीं पाई। इसी बीच खतरे को सूंघते हुए उनका पालतू कुत्ता उन्हें बचाने के लिए बीच में आ गया। वह उसपर लगातार भौंकने लगा। डरकर तेंदुआ अंधेरे में वहां से भाग गया। घटना में कुछ मुर्गों की मौत हो गई। स्मृति ने कहा, टाइगर तेंदुए और मेरी मां के बीच आ गया। उसने बिना डरे तेंदुए पर हमला किया। तेंदुए को इससे झटका लगा वह वहां से भाग गया। तेंदुए के हमले में अरुणा के सिर और कानों में चोट लगी है। उन्हें 20 टांके लगे हैं और उनका सिलिगुड़ी के अस्पताल में इलाज चल रहा है। 

अरुणा ने अतीत की घटना को याद करते हुए कहा कि कैसे टाइगर (उनका पालतू कुत्ता) ने उनका कर्ज उतार दिया है। उन्होंने कहा, 'हमे वो 2017 में विरोध प्रदर्शन के दौरान भूख से तड़पते हुए मिला था। उस समय 104 दिनों के बंद के कारण पहाड़ों पर भोजन की कमी थी। हम उसे घर लेकर आए और पिछले दो सालों के दौरान हमारा रिश्ता बढ़ा है। यदि वह नहीं होता तो मैं यह कहानी सुनाने के लिए जिंदा नहीं होती। हम उसे खाना खिलाकर वापस उसके मालिकों के पास भेजने की कोशिश करते थे लेकिन वह वापस आ जाता था। इसके बाद हम उसे घर ले आए और टाइगर हमारे परिवार का सदस्य बन गया।'

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Akshay Jinghalia

अक्षय झिंगलिया News4Social के कंटेंट राइटर हैं, जो राष्ट्रीय और राज्य स्तर की ख़बरों, राजनीति और समसामयिक विषयों पर रिपोर्टिंग करते हैं। उनका ज़ोर तथ्यों की सटीकता और संतुलित, ज़िम्मेदार रिपोर्टिंग पर रहता है। सभी लेख देखें →

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