गुरूवार, 20 अगस्त 2026 · नई दिल्ली
राजनीति

जंतर-मंतर पर हिंसा: सुप्रीम कोर्ट ने बनाई हाई-पावर कमेटी, पुलिस और प्रदर्शनकारियों दोनों के रवैये की होगी जांच

सुप्रीम कोर्ट ने देश के विभिन्न हिस्सों, जिसमें दिल्ली का जंतर-मंतर भी शामिल है, में हुए विरोध प्रदर्शनों के दौरान हिंसा की घटनाओं की जांच के लिए एक उच्च-शक्ति विशेषज्ञ समिति (HPEC) का गठन किया है…

जंतर-मंतर पर हिंसा: सुप्रीम कोर्ट ने बनाई हाई-पावर कमेटी, पुलिस और प्रदर्शनकारियों दोनों के रवैये की होगी जांच
(फोटो: IANS)

सुप्रीम कोर्ट ने देश के विभिन्न हिस्सों, जिसमें दिल्ली का जंतर-मंतर भी शामिल है, में हुए विरोध प्रदर्शनों के दौरान हिंसा की घटनाओं की जांच के लिए एक उच्च-शक्ति विशेषज्ञ समिति (HPEC) का गठन किया है। यह पांच सदस्यीय समिति पुलिस और सुरक्षा बलों के साथ-साथ प्रदर्शनकारियों की भूमिका की भी पड़ताल करेगी। समाचार एजेंसी IANS के मुताबिक, अदालत ने कहा है कि समिति के सदस्यों के अनुभव और विशेषज्ञता को देखते हुए यह फैसला लिया गया है और इसकी रिपोर्ट भविष्य के फैसलों में अहम साबित होगी।

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इस मामले की अगली सुनवाई 10 सितंबर को होनी है, और सुप्रीम कोर्ट ने समिति से जल्द से जल्द अपनी अंतरिम रिपोर्ट दाखिल करने को कहा है।

कौन हैं समिति के सदस्य?

सुप्रीम कोर्ट के पूर्व न्यायाधीश जस्टिस आर. सुभाष रेड्डी को इस कमेटी का अध्यक्ष नियुक्त किया गया है। समिति के अन्य सदस्यों में पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट के पूर्व मुख्य न्यायाधीश जस्टिस रवि शंकर झा, दिल्ली हाईकोर्ट की पूर्व न्यायाधीश जस्टिस शालिंदर कौर, सीबीआई के पूर्व निदेशक ऋषि कुमार शुक्ला और मेघालय के पूर्व डीजीपी डॉ. एल.आर. बिश्नोई शामिल हैं।

जांच के दायरे में क्या-क्या होगा?

समिति का जांच का दायरा काफी व्यापक है, जिसमें दोनों पक्षों की कार्रवाई शामिल है:

पुलिस और सुरक्षा बलों की कार्रवाई:

  • क्या प्रदर्शनकारियों पर ज़रूरत से ज़्यादा या अनुचित बल का प्रयोग किया गया?
  • पैलेट गन, लाठी, आंसू गैस और बिजली के डंडों का इस्तेमाल किन परिस्थितियों में और क्या चेतावनी देकर किया गया?
  • क्या पुलिसकर्मियों ने वर्दी और नेमप्लेट पहनी थी ताकि उनकी पहचान हो सके?
  • महिला प्रदर्शनकारियों से हिंसा, छेड़छाड़ या उत्पीड़न के आरोपों की जांच।
  • घायलों को मिली चिकित्सा सुविधा और मुआवजे की समीक्षा।
  • विरोध प्रदर्शनों को रोकने के लिए धारा 163 के इस्तेमाल की समीक्षा।

प्रदर्शनकारियों की भूमिका:

  • सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि समिति सिर्फ़ पुलिस की कार्रवाई नहीं, बल्कि प्रदर्शनकारियों द्वारा की गई हिंसा की भी जांच करेगी।
  • पुलिसकर्मियों पर हमले और उन्हें लगी चोटों के मामलों की पड़ताल की जाएगी।
  • प्रदर्शन के दौरान सरकारी और निजी संपत्ति को हुए नुकसान का भी आकलन किया जाएगा।

इसके अलावा, कमेटी इस बात पर भी विचार करेगी कि क्या प्रदर्शनकारियों पर पैलेट गन जैसे धातु के प्रोजेक्टाइल के इस्तेमाल पर रोक लगनी चाहिए। साथ ही, प्रदर्शनकारियों की निगरानी और निजता के अधिकार के बीच संतुलन की भी समीक्षा की जाएगी।

इनपुट: IANS

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News4Social राजनीति डेस्क

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