बुधवार, 15 जुलाई 2026 · नई दिल्ली
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पश्चिम बंगाल: सरकारी ठेकों में अब नहीं चलेगा 'एक्सटेंशन राज', समय पर नए टेंडर अनिवार्य

पश्चिम बंगाल में सरकारी कामकाज में पारदर्शिता और वित्तीय अनुशासन सुनिश्चित करने के लिए राज्य सरकार ने एक बड़ा कदम उठाया है। अब सरकारी विभागों में किसी एक ही एजेंसी के ठेके (कॉन्ट्रैक्ट) को बार-बार बढ़

पश्चिम बंगाल: सरकारी ठेकों में अब नहीं चलेगा 'एक्सटेंशन राज', समय पर नए टेंडर अनिवार्य
(फोटो: IANS)

पश्चिम बंगाल में सरकारी कामकाज में पारदर्शिता और वित्तीय अनुशासन सुनिश्चित करने के लिए राज्य सरकार ने एक बड़ा कदम उठाया है। अब सरकारी विभागों में किसी एक ही एजेंसी के ठेके (कॉन्ट्रैक्ट) को बार-बार बढ़ाने की पुरानी व्यवस्था पर पूरी तरह रोक लगा दी गई है। समाचार एजेंसी IANS से मिली जानकारी के अनुसार, राज्य सचिवालय 'नबान्न' ने एक सर्कुलर जारी कर सभी विभागों के लिए नए और सख्त दिशा-निर्देश तय किए हैं।

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मुख्य सचिव मनोज कुमार अग्रवाल द्वारा जारी इस सर्कुलर में स्पष्ट किया गया है कि किसी भी मौजूदा अनुबंध के समाप्त होने से कम से कम तीन महीने पहले नई एजेंसी के चयन के लिए टेंडर प्रक्रिया शुरू करना अनिवार्य होगा। यह फैसला उस प्रवृत्ति को रोकने के लिए लिया गया है, जिसमें कई विभाग समय पर नए टेंडर जारी करने के बजाय मौजूदा ठेके की अवधि बढ़ाने के लिए वित्त विभाग से अनुमति मांगते रहते थे।

क्यों पड़ी इस सख्ती की ज़रूरत?

सरकार का मानना है कि एक ही एजेंसी का कॉन्ट्रैक्ट बार-बार बढ़ाने की प्रथा प्रतिस्पर्धी टेंडर प्रणाली की पारदर्शिता और निष्पक्षता को कमजोर करती है। रिपोर्ट के मुताबिक, कुछ मामलों में तो विभागों ने बिना वित्त विभाग से सलाह-मशविरा किए ही ठेकों की अवधि बढ़ा दी थी, जो वित्तीय अनुशासन का सीधा उल्लंघन है।

नए नियम और जवाबदेही

नए निर्देशों के तहत, अब किसी भी परिस्थिति में मौजूदा कॉन्ट्रैक्ट के विस्तार या नवीनीकरण से जुड़ा कोई भी प्रस्ताव स्वीकार नहीं किया जाएगा। सभी विभागाध्यक्षों को हर महीने अपने विभाग के सभी अनुबंधों की समीक्षा करने और उसकी सूची वित्त विभाग को भेजने के लिए कहा गया है।

सरकार ने चेतावनी दी है कि यदि समय पर टेंडर जारी नहीं किया गया या बिना अनुमति के किसी कॉन्ट्रैक्ट की अवधि बढ़ाई गई, तो इसे एक 'गंभीर वित्तीय अनियमितता' माना जाएगा। इसके लिए जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ नियमों के अनुसार सख्त कार्रवाई की जाएगी।

यह नया नियम सिर्फ सरकारी विभागों तक ही सीमित नहीं है, बल्कि इसे राज्य के सभी स्थानीय निकायों, सार्वजनिक उपक्रमों (PSUs), वैधानिक निकायों और अन्य सरकारी संस्थाओं पर भी सख्ती से लागू किया जाएगा। विभागाध्यक्षों को व्यक्तिगत रूप से इन निर्देशों का पालन सुनिश्चित करने के लिए जिम्मेदार बनाया गया है।

इनपुट: IANS

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News4Social पश्चिम बंगाल डेस्क

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