बुधवार, 23 सितम्बर 2026 · नई दिल्ली
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परिसीमन पर चर्चा के लिए सर्वदलीय बैठक बुलाएँ: पीएम मोदी को खड़गे ने दोबारा लिखा पत्र

कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने परिसीमन के मुद्दे पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को एक और पत्र लिखकर सर्वदलीय बैठक बुलाने की अपनी मांग दोहराई है। समाचार एजेंसी IANS के अनुसार, खड़गे ने यह पत्र…

परिसीमन पर चर्चा के लिए सर्वदलीय बैठक बुलाएँ: पीएम मोदी को खड़गे ने दोबारा लिखा पत्र
(फोटो: IANS)

कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने परिसीमन के मुद्दे पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को एक और पत्र लिखकर सर्वदलीय बैठक बुलाने की अपनी मांग दोहराई है। समाचार एजेंसी IANS के अनुसार, खड़गे ने यह पत्र एक केंद्रीय मंत्री के टीवी इंटरव्यू के बाद लिखा है, जिसमें संसद का विशेष सत्र बुलाए जाने की संभावना जताई गई थी।

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मंगलवार को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर पत्र की प्रति साझा करते हुए खड़गे ने कहा कि उन्होंने पहले भी 16 जुलाई को प्रधानमंत्री से इसी मुद्दे पर चर्चा के लिए अनुरोध किया था। अपने नए पत्र में उन्होंने लिखा, "मैं अब इस अनुरोध को दोहराने के लिए लिख रहा हूं क्योंकि केंद्रीय संसदीय कार्य मंत्री ने कल रात एक टेलीविजन साक्षात्कार में सार्वजनिक रूप से कहा है कि संसद का ऐसा विशेष सत्र बुलाया जा सकता है।"

कांग्रेस की तीन प्रमुख मांगें

खड़गे ने पत्र में परिसीमन को लेकर अपनी पार्टी का रुख स्पष्ट करते हुए तीन मांगें रखीं। कांग्रेस चाहती है कि अगले 25 वर्षों तक लोकसभा की सदस्य संख्या 543 पर स्थिर रखी जाए और राज्यों को मिली सीटों की संख्या में भी कोई बदलाव न हो। तीसरी मांग के तौर पर उन्होंने 2029 के लोकसभा चुनावों से महिलाओं के लिए एक-तिहाई आरक्षण लागू करने की बात कही।

सरकार से दो बातों पर ध्यान देने का आग्रह

कांग्रेस अध्यक्ष ने प्रधानमंत्री से आग्रह किया कि इस दिशा में कोई भी कदम उठाने से पहले सरकार दो बातों पर विचार करे। पहली, परिसीमन से जुड़े किसी भी प्रस्ताव पर चर्चा के लिए सभी राजनीतिक दलों की एक बैठक बुलाई जाए। दूसरी, इन प्रस्तावों का अध्ययन करने के लिए सभी राजनीतिक दलों और राज्य सरकारों को पर्याप्त समय दिया जाना चाहिए।

पत्र के अंत में उन्होंने लिखा कि यह देश के लिए एक बेहद महत्वपूर्ण विषय है और इसे "जबरदस्ती थोपने" का प्रयास नहीं किया जाना चाहिए। उल्लेखनीय है कि परिसीमन का मुद्दा, खासकर दक्षिणी राज्यों में, काफी संवेदनशील माना जाता है। विपक्ष को आशंका है कि यदि जनसंख्या को आधार बनाया गया तो जनसंख्या नियंत्रण में बेहतर प्रदर्शन करने वाले दक्षिणी राज्यों का संसद में प्रतिनिधित्व घट सकता है।

इनपुट: IANS

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News4Social राजनीति डेस्क

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