बुधवार, 22 जुलाई 2026 · नई दिल्ली
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सिंधु जल संधि: रक्षा विशेषज्ञ ने कहा - 'आतंकवाद और बातचीत साथ नहीं चल सकते'

रक्षा विशेषज्ञ अनिल गौर ने 1960 की सिंधु जल संधि (Indस वाटर ट्रीटी) पर भारत के रुख का समर्थन करते हुए कहा है कि आतंकवाद जारी रहने तक इस पर कोई बातचीत नहीं होनी चाहिए। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि…

सिंधु जल संधि: रक्षा विशेषज्ञ ने कहा - 'आतंकवाद और बातचीत साथ नहीं चल सकते'
(फोटो: IANS)

रक्षा विशेषज्ञ अनिल गौर ने 1960 की सिंधु जल संधि (Indस वाटर ट्रीटी) पर भारत के रुख का समर्थन करते हुए कहा है कि आतंकवाद जारी रहने तक इस पर कोई बातचीत नहीं होनी चाहिए। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का यह कहना सही है कि "बातचीत और आतंकवाद साथ-साथ नहीं चल सकते।"

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समाचार एजेंसी IANS से बातचीत में अनिल गौर ने संधि की समीक्षा की भारत की मांग को उचित ठहराया। उन्होंने तर्क दिया कि मौजूदा संधि के तहत पाकिस्तान को उसकी जरूरत से कहीं ज्यादा पानी मिल रहा है, जबकि भारत को उसकी तुलना में कम पानी आवंटित हुआ है, जिसके कारण भारत को नुकसान हुआ है।

संधि की समीक्षा क्यों जरूरी?

अनिल गौर के अनुसार, संधि की समीक्षा इसलिए भी आवश्यक है क्योंकि समय के साथ भारत की पानी की जरूरतें बढ़ी हैं। उन्होंने कहा, "तुलना की जाए तो भारत को इस पानी की ज़्यादा जरूरत है।" उन्होंने यह भी बताया कि पाकिस्तान के पास अन्य नदियों से पर्याप्त पानी पहुंच रहा है, इसलिए अब उसे उसकी वास्तविक जरूरत के हिसाब से ही पानी दिया जाना चाहिए।

रक्षा विशेषज्ञ ने हाल ही में हुई घुसपैठ की घटनाओं का जिक्र करते हुए पाकिस्तान को एक स्पष्ट संदेश दिया। उन्होंने कहा, "अगर उनको भारत के साथ में ऐसे ही करना है तो फिर आप इस पानी को भूल जाएं।" गौर ने आगे कहा कि यदि पाकिस्तान इस मुद्दे पर सार्थक बातचीत चाहता है, तो उसे पहले आतंकवाद को बंद करना होगा। उन्होंने कहा, "फिर बैठ के नेगोशिएट करते हैं।"

इनपुट: IANS

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News4Social राजनीति डेस्क

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