मंगलवार, 25 अगस्त 2026 · नई दिल्ली
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रक्षाबंधन 2024: इस साल बाज़ार में 30,000 करोड़ रुपये की बिक्री का अनुमान, मोदी-थीम वाली राखियाँ बनीं आकर्षण का केंद्र

इस साल रक्षाबंधन के त्योहार पर देशभर के बाज़ारों में रिकॉर्ड तोड़ कारोबार होने की उम्मीद जताई जा रही है। कॉन्फेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया ट्रेडर्स (कैट) के अनुसार, इस मौके पर कुल व्यापार 30,000 करोड़ रुपये…

रक्षाबंधन 2024: इस साल बाज़ार में 30,000 करोड़ रुपये की बिक्री का अनुमान, मोदी-थीम वाली राखियाँ बनीं आकर्षण का केंद्र
(फोटो: IANS)

इस साल रक्षाबंधन के त्योहार पर देशभर के बाज़ारों में रिकॉर्ड तोड़ कारोबार होने की उम्मीद जताई जा रही है। कॉन्फेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया ट्रेडर्स (कैट) के अनुसार, इस मौके पर कुल व्यापार 30,000 करोड़ रुपये का आँकड़ा पार कर सकता है, जिसमें अकेले राखियों की बिक्री से लगभग 25,000 करोड़ रुपये आने का अनुमान है। समाचार एजेंसी IANS की एक रिपोर्ट के मुताबिक, यह आँकड़ा भारतीय अर्थव्यवस्था में त्योहारी खरीद के महत्व को दर्शाता है।

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कैट के राष्ट्रीय महामंत्री और चांदनी चौक से सांसद प्रवीन खंडेलवाल ने मंगलवार को बताया कि त्योहारी खरीदारी अब अपने चरम पर पहुँच चुकी है। दिल्ली के प्रमुख बाज़ारों जैसे चांदनी चौक, सदर बाज़ार, करोल बाग और लाजपत नगर में ग्राहकों की भारी भीड़ उमड़ रही है। उन्होंने कहा कि अकेले दिल्ली में ही राखी का कारोबार करीब 4,000 करोड़ रुपये का हो सकता है।

थीम वाली राखियों का नया चलन

इस बार पारंपरिक राखियों के अलावा एक नया ट्रेंड देखने को मिल रहा है। बाज़ारों में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की योजनाओं और ‘विकसित भारत’ के संकल्प से प्रेरित राखियों की भारी मांग है। ये राखियाँ सिर्फ एक धागा नहीं, बल्कि एक संदेश भी दे रही हैं।

खास तौर पर ‘विकसित भारत राखी’, ‘मोदी गारंटी राखी’, ‘ब्रह्मोस राखी’, ‘नारी वंदन राखी’, ‘आत्मनिर्भर भारत राखी’ और ‘लखपति दीदी राखी’ जैसी थीम वाली राखियाँ लोगों को खूब पसंद आ रही हैं। खंडेलवाल के मुताबिक, युवाओं में ‘ब्रह्मोस राखी’ और ‘राष्ट्र रक्षा सूत्र राखी’ को लेकर विशेष उत्साह है, जबकि महिलाओं के बीच महिला सशक्तिकरण का संदेश देने वाली ‘नारी वंदन’ और ‘लखपति दीदी’ राखियाँ लोकप्रिय हो रही हैं।

स्थानीय अर्थव्यवस्था को मज़बूती

प्रवीन खंडेलवाल ने इस बात पर ज़ोर दिया कि रक्षाबंधन अब सिर्फ भाई-बहन के रिश्ते का पर्व नहीं, बल्कि स्वदेशी, आत्मनिर्भरता और राष्ट्र गौरव का भी उत्सव बन गया है। स्वदेशी राखियों की बढ़ती मांग से लाखों महिला उद्यमियों, स्वयं सहायता समूहों और स्थानीय कारीगरों को सीधा आर्थिक लाभ मिल रहा है।

उन्होंने कहा, “आज की स्वदेशी राखी केवल रक्षा सूत्र नहीं, बल्कि विकसित भारत, आत्मनिर्भर भारत, महिला सशक्तिकरण और राष्ट्र गौरव का सशक्त प्रतीक बन चुकी है।” खंडेलवाल ने व्यापारियों और ग्राहकों से अपील की कि वे प्रधानमंत्री मोदी के ‘वोकल फॉर लोकल’ और ‘आत्मनिर्भर भारत’ के संकल्प को मजबूत करने के लिए भारतीय उत्पादों को प्राथमिकता दें।

इनपुट: IANS

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