भारतीय दफ्तरों में बढ़ा नौकरी बदलने का चलन, हर दूसरा कर्मचारी नई नौकरी की तलाश में: रिपोर्ट
भारत के प्रोफेशनल सर्विसेज़ सेक्टर में एक बड़ी चुनौती उभर रही है, जहाँ कंपनियाँ कर्मचारियों को रोकने के लिए संघर्ष कर रही हैं। मंगलवार को जारी एक रिपोर्ट के मुताबिक, इस क्षेत्र में काम करने वाला हर…
भारत के प्रोफेशनल सर्विसेज़ सेक्टर में एक बड़ी चुनौती उभर रही है, जहाँ कंपनियाँ कर्मचारियों को रोकने के लिए संघर्ष कर रही हैं। मंगलवार को जारी एक रिपोर्ट के मुताबिक, इस क्षेत्र में काम करने वाला हर दूसरा कर्मचारी सक्रिय रूप से नई नौकरी की तलाश में है। यह स्थिति तब और गंभीर हो जाती है, जब पता चलता है कि हर चार में से तीन कर्मचारी अगले एक साल के भीतर अपनी मौजूदा कंपनी छोड़ने की योजना बना रहे हैं।
यह अहम जानकारी 'ग्रेट प्लेस टू वर्क' की एक विस्तृत रिपोर्ट से सामने आई है, जिसने 130 से ज़्यादा संगठनों के 1.1 लाख से अधिक कर्मचारियों का अध्ययन किया है। समाचार एजेंसी IANS के हवाले से मिली इस रिपोर्ट में कार्यस्थल के बदलते माहौल और कर्मचारियों की अपेक्षाओं पर रोशनी डाली गई है। रिपोर्ट के अनुसार, कर्मचारी अब अपनी तय जिम्मेदारियों से बढ़कर काम करने में कम रुचि दिखा रहे हैं, भले ही दफ्तरों में बुनियादी सुविधाओं में सुधार हो रहा हो।
कार्यबल में जेन-ज़ी की बढ़ती हिस्सेदारी
इस बदलाव का एक बड़ा कारण कार्यबल में जेनरेशन-ज़ी (Gen-Z) का बढ़ता प्रभाव है। रिपोर्ट के अनुसार, 2023 में जहाँ जेन-ज़ी की हिस्सेदारी कुल कार्यबल का 17 प्रतिशत थी, वह अब दोगुनी होकर 34 प्रतिशत हो गई है। यह युवा पीढ़ी वेतन, पहचान और प्रमोशन जैसे मामलों में अस्पष्टता को ज़्यादा बर्दाश्त नहीं करती। अगर उनकी उम्मीदें पूरी नहीं होतीं, तो वे नौकरी बदलने में देर नहीं लगाते।
मैनेजरों पर बढ़ा दबाव
दिलचस्प बात यह है कि नौकरी बदलने की यह प्रवृत्ति सिर्फ़ जूनियर स्तर पर नहीं है। आँकड़ों के मुताबिक, 86 प्रतिशत फ्रंटलाइन मैनेजर और सुपरवाइज़र सक्रिय रूप से नई नौकरी खोज रहे हैं, जबकि व्यक्तिगत योगदान देने वाले कर्मचारियों में यह संख्या 53 प्रतिशत है। रिपोर्ट इन मैनेजरों को 'शॉक एब्जॉर्बर' कहती है, जो प्रोजेक्ट पूरा करने, ग्राहकों की माँगों और अपनी टीम को संभालने का दोहरा दबाव झेल रहे हैं।
ग्रेट प्लेस टू वर्क इंडिया के प्रबंध निदेशक, अक्षत शाह ने कहा, “प्रोफेशनल सर्विसेज क्षेत्र के लीडर्स को अपने कर्मचारियों की भागीदारी और उन्हें बनाए रखने के तरीकों को नए सिरे से परिभाषित करना होगा और विविध कार्यबल की व्यक्तिगत अपेक्षाओं के अनुरूप बनाना होगा।”
तकनीक और पारदर्शिता का सवाल
रिपोर्ट में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के इस्तेमाल पर भी ध्यान दिया गया है। करीब 10 में से 6 संगठन अपने रोज़मर्रा के कामों में AI का उपयोग कर रहे हैं। हालाँकि, कर्मचारियों के बीच इसे लेकर पूरी तरह स्पष्टता नहीं है। हर 10 में से सिर्फ 2 कर्मचारियों ने माना कि उन्हें AI टूल्स से जुड़े जोखिमों और फायदों के बारे में पर्याप्त जानकारी दी गई है।
इनपुट: IANS



