पश्चिम बंगाल मतदाता सूची: 37 लाख लंबित अपीलों पर सुप्रीम कोर्ट ने चिंता जताई, निपटारे की धीमी गति पर सवाल
पश्चिम बंगाल में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) से जुड़े एक मामले में लाखों अपीलों के लंबित होने पर सुप्रीम कोर्ट ने गहरी चिंता व्यक्त की है। सुनवाई के दौरान न्यायाधीशों ने इस बात पर सवाल…
पश्चिम बंगाल में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) से जुड़े एक मामले में लाखों अपीलों के लंबित होने पर सुप्रीम कोर्ट ने गहरी चिंता व्यक्त की है। सुनवाई के दौरान न्यायाधीशों ने इस बात पर सवाल उठाया कि लगभग 37 लाख अपीलों का निपटारा कैसे होगा, जबकि अभी तक सिर्फ करीब 87 हजार याचिकाकर्ताओं से जुड़े मामलों पर ही फैसला हो पाया है।
मामले से जुड़े अधिवक्ता रऊफ रहीम ने समाचार एजेंसी IANS को बताया कि अदालत ने यह भी जानना चाहा है कि ये 37 लाख अपीलें किसने और क्यों दायर की हैं, खासकर यदि इन्हें निर्वाचन आयोग (ECI) की ओर से दाखिल किया गया है।
धीमी प्रक्रिया और मतदान के अधिकार पर चिंता
अधिवक्ता रहीम के अनुसार, उन्होंने अदालत में दलील दी कि जिन लोगों ने शुरुआत में अपीलें दाखिल की थीं, उनकी सुनवाई को प्राथमिकता दी जानी चाहिए। उन्होंने निर्वाचन आयोग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए कहा कि आयोग बड़ी मात्रा में डेटा अदालत के सामने रख रहा है, जिससे प्रक्रिया के लंबे समय तक खिंचने की आशंका है।
उन्होंने कहा, "जिस गति से मामले आगे बढ़ रहे हैं, उसे देखते हुए मुझे भरोसा नहीं है कि अगले पांच वर्षों के भीतर ट्रिब्यूनल में इन मामलों का पूरा निपटारा हो पाएगा।" रहीम ने इस बात पर जोर दिया कि मतदाता सूची से जुड़े मामलों का समय पर निपटारा होना बेहद जरूरी है, क्योंकि यह सीधे तौर पर नागरिकों के मतदान के अधिकार से जुड़ा है।
सुप्रीम कोर्ट से हस्तक्षेप की उम्मीद
रऊफ रहीम ने विश्वास जताया कि सुप्रीम कोर्ट इस मामले में हस्तक्षेप करेगा और जरूरत पड़ने पर सख्त कदम भी उठाएगा। उन्होंने कहा, "अदालत को ऐसी कार्यप्रणाली सुनिश्चित करनी चाहिए, जिससे मामलों का उचित और समयबद्ध तरीके से निपटारा हो सके।"
उन्होंने अपनी बात समाप्त करते हुए कहा कि मतदाता सूची में दर्ज लोगों और मतदान का अधिकार रखने वाले नागरिकों के अधिकारों की रक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता होनी चाहिए और इससे जुड़े विवादों का समाधान अनावश्यक रूप से लंबा नहीं खिंचना चाहिए।
इनपुट: IANS



