मंगलवार, 21 जुलाई 2026 · नई दिल्ली
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नोएडा मेट्रो का बड़ा अपग्रेड: एक्वा लाइन पर लगेंगे 200 नए ऑटोमेटिक गेट, 'वन नेशन वन कार्ड' से होगा सफ़र

नोएडा और ग्रेटर नोएडा को जोड़ने वाली एक्वा लाइन मेट्रो में यात्रा का अनुभव जल्द ही और आधुनिक और सुविधाजनक होने वाला है। नोएडा मेट्रो रेल कॉर्पोरेशन (एनएमआरसी) ने अपनी टिकटिंग प्रणाली को पूरी तरह से…

नोएडा मेट्रो का बड़ा अपग्रेड: एक्वा लाइन पर लगेंगे 200 नए ऑटोमेटिक गेट, 'वन नेशन वन कार्ड' से होगा सफ़र
(फोटो: IANS)

नोएडा और ग्रेटर नोएडा को जोड़ने वाली एक्वा लाइन मेट्रो में यात्रा का अनुभव जल्द ही और आधुनिक और सुविधाजनक होने वाला है। नोएडा मेट्रो रेल कॉर्पोरेशन (एनएमआरसी) ने अपनी टिकटिंग प्रणाली को पूरी तरह से बदलने का फैसला किया है, जिसके तहत सभी 21 स्टेशनों पर लगे करीब 200 पुराने ऑटोमेटिक फेयर कलेक्शन (एएफसी) गेट हटाए जाएँगे। समाचार एजेंसी IANS के मुताबिक, इन पुराने गेटों की जगह अत्याधुनिक मशीनें लगाई जाएँगी, जो 'वन नेशन वन कार्ड' यानी नेशनल कॉमन मोबिलिटी कार्ड (NCMC) को भी सपोर्ट करेंगी।

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इस महत्वाकांक्षी परियोजना पर करीब 23 करोड़ रुपये की लागत आने का अनुमान है। एनएमआरसी ने इसके लिए टेंडर भी जारी कर दिया है, जिसमें इच्छुक कंपनियों को 30 जुलाई तक आवेदन करने को कहा गया है।

क्यों पड़ी इस बदलाव की ज़रूरत?

एनएमआरसी के कार्यकारी निदेशक क्रांति शेखर सिंह ने बताया कि 2019 में एक्वा लाइन की शुरुआत के समय लगे मौजूदा एएफसी गेटों में अब बार-बार तकनीकी खराबी की शिकायतें आ रही थीं। हालाँकि, इन्हें मोबाइल ऐप आधारित सुविधाओं के लिए अपग्रेड किया गया था, लेकिन ये अब पर्याप्त नहीं हैं। उन्होंने कहा कि इस परियोजना का मुख्य उद्देश्य यात्रियों को एक बेहतर और बिना रुकावट वाला यात्रा अनुभव देना है।

भविष्य की तैयारी और यात्रियों को लाभ

यह अपग्रेड सिर्फ तकनीकी समस्याओं को दूर करने के लिए ही नहीं, बल्कि भविष्य की ज़रूरतों को ध्यान में रखकर भी किया जा रहा है। अधिकारियों का मानना है कि जेवर में नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट के शुरू होने के बाद यात्रियों की संख्या में भारी बढ़ोतरी होगी। ऐसे में एक तेज़ और भरोसेमंद टिकटिंग प्रणाली आवश्यक है।

नई प्रणाली लागू होने के बाद यात्री एक ही कार्ड (NCMC) से देश के अन्य हिस्सों की तरह नोएडा मेट्रो में भी सफ़र कर सकेंगे, जिससे अलग-अलग कार्ड खरीदने का झंझट खत्म होगा। इससे टिकट काउंटरों पर लगने वाला समय बचेगा, कतारें कम होंगी और यात्रा पहले से ज़्यादा आसान हो जाएगी। टेंडर हासिल करने वाली एजेंसी को नए गेट लगाने के साथ-साथ अगले चार वर्षों तक उनके रखरखाव की ज़िम्मेदारी भी संभालनी होगी।

इनपुट: IANS

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News4Social उत्तर प्रदेश डेस्क

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