नीतीश कुमार के AI-वीडियो विवाद में प्रशांत किशोर पर FIR, JDU ने लगाया चुनाव प्रभावित करने का आरोप
बिहार के बांकीपुर विधानसभा उपचुनाव में मतदान से ठीक एक दिन पहले, पूर्व मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के एक वीडियो संदेश को लेकर सियासी घमासान तेज हो गया है। समाचार एजेंसी IANS के अनुसार, जन सुराज के…
बिहार के बांकीपुर विधानसभा उपचुनाव में मतदान से ठीक एक दिन पहले, पूर्व मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के एक वीडियो संदेश को लेकर सियासी घमासान तेज हो गया है। समाचार एजेंसी IANS के अनुसार, जन सुराज के संस्थापक और उम्मीदवार प्रशांत किशोर के खिलाफ बुधवार को पटना के शास्त्रीनगर थाने में एक शिकायत दर्ज कराई गई है। यह शिकायत जनता दल (यूनाइटेड) के विधान पार्षद और मुख्य प्रवक्ता नीरज कुमार ने दर्ज कराई है, जिसमें किशोर पर नीतीश कुमार के वीडियो को AI-निर्मित बताकर मतदाताओं को गुमराह करने का आरोप लगाया गया है।
मामला बांकीपुर उपचुनाव से जुड़ा है, जहाँ 30 जुलाई को मतदान होना है। चुनाव प्रचार के अंतिम दौर में, JDU के वरिष्ठ नेता नीतीश कुमार ने एक वीडियो संदेश जारी कर NDA समर्थित भाजपा उम्मीदवार नीरज कुमार सिन्हा के पक्ष में वोट देने की अपील की थी। इसी वीडियो को लेकर प्रशांत किशोर ने आरोप लगाया था कि यह फर्जी है और इसे भाजपा ने चुनावी लाभ के लिए AI की मदद से तैयार किया है।
चुनाव से पहले झूठे बयान का आरोप
JDU नेता नीरज कुमार ने अपनी लिखित शिकायत में प्रशांत किशोर के दावों को पूरी तरह झूठा, भ्रामक और चुनावी माहौल को प्रभावित करने वाला बताया है। उनका कहना है कि नीतीश कुमार का वीडियो पूरी तरह से प्रामाणिक है और किशोर के आरोप तथ्यात्मक रूप से गलत हैं। शिकायत में कहा गया है कि इन आरोपों का मकसद मतदान से ठीक पहले मतदाताओं के बीच भ्रम फैलाना और भाजपा उम्मीदवार को मिल रहे समर्थन को बदनाम करना है।
नीरज कुमार ने यह भी आशंका जताई कि इस तरह की भ्रामक जानकारी से भाजपा, जदयू और जन सुराज के समर्थकों के बीच अविश्वास और तनाव पैदा हो सकता है, जिससे कानून-व्यवस्था की स्थिति बिगड़ने का खतरा है। उन्होंने पुलिस से इलेक्ट्रॉनिक सबूतों को सुरक्षित रखने और तत्काल जांच की मांग की है।
कानूनी कार्रवाई की मांग
थाने में शिकायत दर्ज कराने के बाद मीडिया से बातचीत में नीरज कुमार ने कहा कि यह पूर्व मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के सार्वजनिक जीवन की विश्वसनीयता पर सवाल उठाने का प्रयास है। उन्होंने कहा, "किसी प्रामाणिक वीडियो को बिना किसी आधार के कृत्रिम या AI से निर्मित बताना सार्वजनिक जीवन का अपमान है और इसकी विधिवत जांच होनी चाहिए।"
JDU प्रवक्ता ने कहा कि इस मामले में भारतीय न्याय संहिता, भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता और जनप्रतिनिधित्व अधिनियम, 1951 की विभिन्न धाराएं लागू हो सकती हैं। हालांकि, उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि कौन सी धाराएं लगेंगी, यह पुलिस जांच के बाद तय करेगी। उन्होंने पुलिस से इस शिकायत पर कानूनी कार्रवाई करने का अनुरोध किया है।
इनपुट: IANS



