राम जन्मभूमि ट्रस्ट: निर्मोही अखाड़ा 8 मांगों के साथ सुप्रीम कोर्ट पहुंचा, फोरेंसिक ऑडिट और निगरानी समिति की मांग
अयोध्या के ऐतिहासिक राम जन्मभूमि मामले में एक नया मोड़ आया है। निर्मोही अखाड़े ने श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट में अपनी भूमिका, कामकाज की पारदर्शिता और अन्य मुद्दों को लेकर सुप्रीम कोर्ट में…
अयोध्या के ऐतिहासिक राम जन्मभूमि मामले में एक नया मोड़ आया है। निर्मोही अखाड़े ने श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट में अपनी भूमिका, कामकाज की पारदर्शिता और अन्य मुद्दों को लेकर सुप्रीम कोर्ट में एक याचिका दायर की है। समाचार एजेंसी IANS की रिपोर्ट के मुताबिक, इस याचिका में कुल आठ मांगें रखी गई हैं, जिनमें ट्रस्ट के वित्तीय मामलों की फोरेंसिक ऑडिट कराने और जब्त की गई मूर्तियों को वापस करने जैसी महत्वपूर्ण मांगें शामिल हैं।
यह याचिका ऐतिहासिक ‘एम. सिद्दीक बनाम महंत सुरेश दास’ मामले में ही दायर की गई है। अखाड़े के वकील तरुणजीत वर्मा ने बताया कि सबसे प्रमुख मांग सुप्रीम कोर्ट के 9 नवंबर 2019 के फैसले में दिए गए ‘उचित प्रतिनिधित्व’ के निर्देश को स्पष्ट करने से जुड़ी है।
ट्रस्ट में भूमिका और पारदर्शिता पर सवाल
वर्तमान में, 15 सदस्यीय ट्रस्ट में निर्मोही अखाड़े का प्रतिनिधित्व महंत दिनेंद्र दास कर रहे हैं। अखाड़ा अब अदालत से यह स्पष्ट करवाना चाहता है कि ‘उचित प्रतिनिधित्व’ का वास्तविक अर्थ और दायरा क्या है। इसके साथ ही, ट्रस्ट के संचालन में पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए हाईकोर्ट के तहत एक निगरानी समिति गठित करने की भी मांग की गई है, ताकि किसी भी तरह की अनियमितता को रोका जा सके।
पुरानी मूर्तियों की वापसी और पूजा का अधिकार
याचिका में एक और अहम मांग उन मूर्तियों को वापस करने की है, जिन्हें 5 जनवरी 1950 और 16 फरवरी 1982 को विवादित परिसर के भीतरी और बाहरी आंगनों से जब्त किया गया था। अखाड़े का कहना है कि इन मूर्तियों को पूजा के लिए वापस सौंपा जाए। अगर ऐसा संभव नहीं होता है, तो अखाड़े को अपने स्तर पर उनकी पूजा करने की अनुमति दी जानी चाहिए।
अखाड़े में आंतरिक बदलाव
इस कानूनी कदम के साथ ही निर्मोही अखाड़े के भीतर भी महत्वपूर्ण बदलाव हुए हैं। वकील तरुणजीत वर्मा के अनुसार, अखाड़े ने एक प्रस्ताव पारित कर महंत दिनेंद्र दास को मुख्य महंत के पद से हटा दिया है। उन पर मनमाने ढंग से काम करने और दूसरों की बात न सुनने जैसे आरोप लगाए गए हैं। अब वह केवल एक पंच की भूमिका में रहेंगे। उनकी जगह गुजरात के डाकोर निवासी 102 वर्षीय राजा रामचंद्राचार्य जी को निर्मोही अखाड़े का नया मुख्य महंत बनाया गया है।
इनपुट: IANS



