NEET पेपर लीक: प्रदर्शनकारियों पर फेशियल रिकग्निशन तकनीक के इस्तेमाल का मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंचा
नीट-यूजी पेपर लीक को लेकर दिल्ली के जंतर-मंतर पर हुए विरोध प्रदर्शन का मामला एक नए मोड़ पर पहुंच गया है। प्रदर्शनकारियों की पहचान के लिए दिल्ली पुलिस द्वारा फेशियल रिकग्निशन (चेहरा पहचानने की तकनीक)…
नीट-यूजी पेपर लीक को लेकर दिल्ली के जंतर-मंतर पर हुए विरोध प्रदर्शन का मामला एक नए मोड़ पर पहुंच गया है। प्रदर्शनकारियों की पहचान के लिए दिल्ली पुलिस द्वारा फेशियल रिकग्निशन (चेहरा पहचानने की तकनीक) के कथित इस्तेमाल के खिलाफ दायर याचिका पर सुप्रीम कोर्ट सुनवाई के लिए सहमत हो गया है। समाचार एजेंसी IANS की रिपोर्ट के अनुसार, इस याचिका को पेपर लीक से संबंधित अन्य याचिकाओं के साथ जोड़कर सुना जाएगा।
याचिकाकर्ता की ओर से पेश वकील मेनका गुरुस्वामी ने अदालत को बताया कि दिल्ली पुलिस प्रदर्शनकारियों की पहचान करने के लिए इस तकनीक का उपयोग कर रही है। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि इससे जुड़ा डेटा निजी कंपनियों के पास रखा जा रहा है। मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ ने इस नई याचिका को पहले से चल रहे मामलों के साथ संलग्न करने का आदेश दिया।
NTA की कार्यप्रणाली पर सवाल
यह मामला नीट-यूजी 2026 पेपर लीक से जुड़ी उन कई याचिकाओं का हिस्सा है जिन पर 6 अगस्त को सुनवाई हुई थी। उन याचिकाओं में परीक्षा आयोजित करने वाली संस्था, नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठाए गए हैं। याचिकाकर्ताओं ने मांग की है कि केंद्र सरकार को एनटीए को बदलने या उसकी जगह एक नई, तकनीकी रूप से मजबूत और स्वतंत्र संस्था बनाने का निर्देश दिया जाए, ताकि भविष्य में पेपर लीक जैसी घटनाएं न हों।
सरकार का पक्ष और आगामी सुनवाई
इस मामले में केंद्र सरकार पहले ही एक हलफनामा दाखिल कर चुकी है, जिसमें परीक्षा प्रणाली को सुरक्षित बनाने के लिए उठाए गए कदमों की जानकारी दी गई है। सरकार ने बताया है कि 2026 में बने नए कानून के तहत पेपर लीक जैसे अपराधों के लिए 10 साल तक की जेल और 5 करोड़ रुपए तक के जुर्माने का प्रावधान है। साथ ही, इन्फोसिस के सह-संस्थापक नंदन नीलेकणी की अध्यक्षता में एक टास्क फोर्स का भी गठन किया गया है, जो मौजूदा व्यवस्था में सुधार के लिए सुझाव देगी।
सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र के हलफनामे पर याचिकाकर्ताओं से जवाब मांगा है और कहा है कि इसमें कई ऐसे बिंदु हैं जिन पर "विचार और चर्चा की जाएगी"। अब इन सभी मामलों पर अगली सुनवाई 19 अगस्त को होनी है।
इनपुट: IANS



