NEET-UG 2026 टॉपर आर्यन गुप्ता: दूसरी परीक्षा में 19 अंक ज़्यादा लाकर बने AIR-1, भाई को बताया रोल मॉडल
मेडिकल प्रवेश परीक्षा NEET-UG 2026 में पंजाब के आर्यन गुप्ता ने पूरे देश में पहला स्थान हासिल किया है। लुधियाना के रहने वाले आर्यन ने 720 में से 715 अंक हासिल कर ऑल इंडिया रैंक-1 अपने नाम की। समाचार…
मेडिकल प्रवेश परीक्षा NEET-UG 2026 में पंजाब के आर्यन गुप्ता ने पूरे देश में पहला स्थान हासिल किया है। लुधियाना के रहने वाले आर्यन ने 720 में से 715 अंक हासिल कर ऑल इंडिया रैंक-1 अपने नाम की। समाचार एजेंसी IANS से बातचीत में उन्होंने अपनी सफलता का श्रेय लगातार मेहनत, परिवार के सहयोग और अपने बड़े भाई आदित्य गुप्ता को दिया, जिन्हें वे अपना रोल मॉडल मानते हैं।
आर्यन के लिए यह सफ़र आसान नहीं था। परीक्षा रद्द होने और फिर दोबारा आयोजित किए जाने की प्रक्रिया उनके लिए भी एक बड़ी चुनौती थी। उन्होंने बताया, “जब दोबारा परीक्षा की घोषणा हुई तो शुरुआत में उन्हें झटका लगा, क्योंकि दो साल की मेहनत के बाद किताबें बंद कर दी थीं और फिर से पूरी तैयारी शुरू करनी पड़ी।” हालांकि, उन्होंने इस चुनौती को एक अवसर में बदला और पहले से ज़्यादा मेहनत की।
दो परीक्षाओं का सफ़र
आर्यन ने बताया कि पहली परीक्षा में उन्हें 696 अंक मिले थे, लेकिन दोबारा हुई परीक्षा में उन्होंने 715 अंक हासिल कर अपनी रैंक में ज़बरदस्त सुधार किया। उनके अनुसार, दूसरी परीक्षा ज़्यादा कठिन थी, लेकिन उन्हें अपनी मेहनत पर पूरा भरोसा था। आर्यन का मानना है कि नीट जैसी परीक्षा में सफलता के लिए लगातार प्रयास और धैर्य सबसे ज़रूरी है।
डॉक्टरों के परिवार की विरासत
आर्यन एक ऐसे परिवार से आते हैं, जिसकी कई पीढ़ियाँ चिकित्सा के पेशे से जुड़ी हैं। IANS को उन्होंने बताया कि उनके माता-पिता, नाना-नानी, मामा-मामी और बुआ-फूफा सभी डॉक्टर हैं, जिसके कारण उनके मन में भी बचपन से डॉक्टर बनने की इच्छा थी। उनके पिता सचिन गुप्ता ने कहा कि आर्यन पर कभी कोई दबाव नहीं डाला गया। गणित में अच्छा होने के बावजूद डॉक्टर बनने का फ़ैसला आर्यन का अपना था।
आर्यन की माँ रेनू गुप्ता ने कहा कि उनका अस्पताल और घर एक ही जगह होने से बच्चों की पढ़ाई और परिवार की ज़िम्मेदारियों को संभालना आसान रहा। उन्होंने खुशी जताते हुए कहा, “जब बच्चा खुद मेहनत करने के लिए तैयार हो तो माता-पिता का काम उसे सही समर्थन और माहौल देना होता है।”
सफलता का मंत्र
अपनी तैयारी की रणनीति पर आर्यन ने बताया कि उन्होंने क्लास में पढ़ाए गए विषयों को गंभीरता से समझा और घर पर नियमित रूप से होमवर्क और रिवीजन किया। उनके पिता के अनुसार, आर्यन पढ़ाई के साथ-साथ एक सामान्य जीवन भी जीते थे, जिसमें दोस्तों से मिलना और खेलना-कूदना शामिल था, लेकिन पढ़ाई के समय वह पूरी तरह एकाग्र रहते थे।
इसी परीक्षा में झारखंड के गढ़वा जिले के ज्ञानेंद्र गर्व ने भी 676 अंक हासिल कर अपने राज्य में टॉप किया है। उन्होंने भी परीक्षा रद्द होने को एक निराशाजनक अनुभव बताया, लेकिन फिर खुद को संभालकर दोबारा तैयारी में जुट गए।
इनपुट: IANS



