नीट प्रदर्शन हिंसा: सुप्रीम कोर्ट ने 7 राज्यों को भेजा नोटिस, CCTV फुटेज सुरक्षित रखने का आदेश
नीट-यूजी परीक्षा में कथित अनियमितताओं के खिलाफ हुए छात्र प्रदर्शनों में हिंसा और पुलिस कार्रवाई के मामले में सुप्रीम कोर्ट ने एक अहम सुनवाई की है। समाचार एजेंसी IANS की रिपोर्ट के अनुसार, शीर्ष अदाल…
नीट-यूजी परीक्षा में कथित अनियमितताओं के खिलाफ हुए छात्र प्रदर्शनों में हिंसा और पुलिस कार्रवाई के मामले में सुप्रीम कोर्ट ने एक अहम सुनवाई की है। समाचार एजेंसी IANS की रिपोर्ट के अनुसार, शीर्ष अदालत ने इस मामले में दिल्ली, उत्तर प्रदेश, बिहार समेत सात राज्यों की सरकारों को नोटिस जारी कर जवाब तलब किया है। साथ ही, अदालत ने अधिकारियों को निर्देश दिया है कि वे घटनास्थल से जुड़े सभी CCTV फुटेज को सुरक्षित रखें।
मंगलवार को हुई इस सुनवाई में मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस वी. मोहना की पीठ ने यह भी स्पष्ट किया कि प्रदर्शन के दौरान जिन लोगों पर मुकदमा दर्ज हुआ और उनका कोई पुराना आपराधिक रिकॉर्ड नहीं है, उन पर फिलहाल कोई कार्रवाई नहीं की जाएगी।
जांच और पुलिस कार्रवाई पर अदालत की टिप्पणी
सुनवाई के दौरान मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने कहा कि प्रथमदृष्टया यह मामला एक स्वतंत्र, निष्पक्ष और पारदर्शी जांच का है। उन्होंने जोर देकर कहा, "जिसने भी कानून का उल्लंघन किया है, उसके खिलाफ कार्रवाई होगी और यदि जवाबदेही तय नहीं हुई तो जांच का कोई मतलब नहीं रहेगा।" याचिकाकर्ताओं ने मांग की है कि मामले की जांच एक विशेष जांच दल (SIT) से कराई जाए, जिसकी निगरानी सुप्रीम कोर्ट के कोई सेवानिवृत्त न्यायाधीश करें। अदालत SIT की संरचना पर बाद में फैसला करेगी।
याचिकाकर्ताओं की ओर से पेश वरिष्ठ वकील गोपाल शंकर नारायण ने एक वीडियो का हवाला देते हुए आरोप लगाया कि एक एएसआई ने खुद कार के शीशे तोड़े। उन्होंने कहा कि जब तक पुलिस की जिम्मेदारी तय नहीं होगी, ऐसी घटनाएं होती रहेंगी।
छात्रों का प्रदर्शन और 'बिन बुलाए मेहमान'
मुख्य न्यायाधीश ने टिप्पणी की कि यह छात्रों का पूरी तरह से शांतिपूर्ण प्रदर्शन था, जिसमें उन्होंने अपनी मांगें संवैधानिक दायरे में रखीं। उन्होंने यह भी कहा, "ऐसे आंदोलनों में अक्सर कुछ बिन बुलाए मेहमान भी शामिल हो जाते हैं, जो अपने अलग एजेंडे के साथ आते हैं और धीरे-धीरे आंदोलन का हिस्सा बन जाते हैं।"
वहीं, सरकार का पक्ष रखते हुए सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने भी कहा कि प्रदर्शन में कुछ असामाजिक तत्व और 'बिन बुलाए मेहमान' शामिल हो गए थे। उन्होंने अदालत को बताया कि इस घटना में 250 पुलिसकर्मी घायल हुए हैं और सरकार के पास ऐसे आंकड़े हैं जो बताते हैं कि प्रदर्शन में हत्या, दुष्कर्म और NDPS जैसे मामलों के आरोपी भी मौजूद थे। हालांकि, उन्होंने यह भी स्वीकार किया कि अगर छात्रों पर ज़्यादा बल प्रयोग हुआ है तो यह गंभीर चिंता का विषय है और सरकार छात्रों के साथ खड़ी है।
हिरासत में लिए गए नाबालिगों का मुद्दा
एक अन्य वरिष्ठ वकील, शादान फरासत ने बिहार का मामला उठाते हुए अदालत को सूचित किया कि सरकार द्वारा FIR वापस लेने की घोषणा के बावजूद 150 से अधिक नाबालिग अभी भी हिरासत में हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि कई बच्चों को 48 घंटे से अधिक समय तक हिरासत में रखा गया और उनमें से एक की उम्र सिर्फ 13 साल है। इस मामले में अगली सुनवाई 3 अगस्त को होनी तय हुई है।
इनपुट: IANS



